पीएम मोदी के सोशल मीडिया प्रेम से बेशक पूरी दुनिया प्रभावित है। मगर संघ प्रमुख मोहन राव भागवत पर पीएम मोदी का सोशल मीडिया प्रेम बेअसर है। हैरान कर देने वाली बात है कि सोशल मीडिया के इस युग में भी विश्व के सबसे बडे सामाजिक संगठन आरएसएस के मुखिया मोहन राव भागवत का अपना कोई ट्विटर और फेसबूक अकाउंट नहीं है। बल्कि उनके समर्थक स्वयंसेवकों ने उनके नाम से फर्जी अकाउंट बना रखे हैं।
भागवत के कलकत्ता दौरे के दौरान सोमवार को विश्व संवाद केंद्र कलकत्ता ने सफाई देते हुए कहा है कि भागवत का अपना कोई ट्विटर अकाउंट नहीं है। तो फेसबूक अकाउंट को लेकर पूछे गए सवाल पर दिल्ली प्रांत के प्रचार प्रमुख राजीव तूली ने अमर उजाला को जानकारी दी है कि संघ प्रमुख का अपना कोई फेसबूक अकाउंट नहीं है। जबकि संघ के प्रचारक रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगभग अपनी सभी बैठकों में पार्टी के सांसदों और नेताओं को सोशल मीडिया के उपयोग की नसीहत देते हैं।
मोदी का कहना है कि नीचे जनता तक अपनी बात पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया सबसे सस्ता और आसान साधन है। मगर पीएम मोदी की नसीहत का असर उनके अपने पितृ संगठन के मुखिया पर ही नहीं हो रहा है।
मोदी में है सोशल मीडिया की खुमारी
पिछले लोकसभा चुनाव से पीएम मोदी ने सोशल मीडिया को बतौर एक राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल की शुरूआत की है। वह आगे भी जारी रहने वाला है। मोदी ने पार्टी के सांसदों से कहा है कि 2019 का चुनाव भी सोशल मीडिया के जरिए जीता जाएगा।
सोशल मीडिया के प्रति मोदी की खुमारी का आलम है कि न्यूयॉर्क टाइम्स ने मोदी को 'सोशल मीडिया पोलिटिशियन' कहा था। मोदी के सोशल मीडिया प्रेम की बानगी हर जगह दिखती है। चाहे वो चुनाव प्रचार हो या वोटिंग सेल्फी, सरकारी अभियान हों या विदेशी दौरे, उन्होंने सोशल मीडिया का बखूबी इस्तेमाल किया।