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NISAR: यूएस ने ISRO को सौंपा निसार उपग्रह, जानें प्राकृतिक खतरों को भांपने सहित और किस क्षेत्र में होगा सहायक

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Wed, 08 Mar 2023 09:03 PM IST

सार

NISAR को अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के बीच सहयोग के तहत बनाया गया है। उपग्रह का उपयोग ISRO द्वारा कृषि मानचित्रण, और भूस्खलन-प्रभावित क्षेत्रों सहित विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। 
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निसार उपग्रह - फोटो : SOCIAL MEDIA


उपग्रह को अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के बीच सहयोग के तहत बनाया गया है। NISAR का उपयोग ISRO द्वारा कृषि मानचित्रण, और भूस्खलन-प्रभावित क्षेत्रों सहित विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। इसको 2024 में आंध्र प्रदेश के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से निकट-ध्रुवीय कक्षा में लॉन्च किए जाने की उम्मीद है।


आठ साल पहले इस मिशन में शामिल हुआ था इसरो  

इससे पहले इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ ने एक बयान में कहा था कि हम आठ साल से अधिक समय पहले इस मिशन में शामिल हुए थे। लेकिन अब हम NISAR के लिए कल्पना की गई विशाल वैज्ञानिक क्षमता को पूरा करने के लिए करीब आ गए हैं। यह मिशन एक विज्ञान उपकरण के रूप में रडार की क्षमता का एक शक्तिशाली प्रदर्शन होगा और हमें पृथ्वी की गतिशील भूमि और बर्फ की सतहों का पहले से कहीं अधिक विस्तार से अध्ययन करने में मदद करेगा। 


रिफ्लेक्टर एंटीना के साथ रडार डेटा एकत्र करेगा उपग्रह 

बता दें कि NISAR लगभग 40 फीट (12 मीटर) व्यास वाले ड्रम के आकार के रिफ्लेक्टर एंटीना के साथ रडार डेटा एकत्र करेगा। यह पृथ्वी की भूमि और बर्फ की सतहों में एक इंच के अंश तक परिवर्तन का निरीक्षण करने के लिए इंटरफेरोमेट्रिक सिंथेटिक एपर्चर रडार या इनएसएआर नामक सिग्नल-प्रोसेसिंग तकनीक का उपयोग करेगा। 


इसके अलावा निसार, मिशन बायोमास, प्राकृतिक खतरों, समुद्र के स्तर में वृद्धि और भूजल के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए पृथ्वी के बदलते पारिस्थितिक तंत्र, गतिशील स्तरों और बर्फ के द्रव्यमान को मापेगा एवं अन्य तरह की तकनीकी सहायता भी प्रदान करेगा।
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