पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर न्यायिक निगरानी अब और सख्त होती दिख रही है। कलकत्ता हाई कोर्ट ने प्रक्रिया को समयबद्ध और पारदर्शी बनाने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए झारखंड और ओडिशा से 100-100 अतिरिक्त न्यायिक अधिकारियों की मांग की है। अदालत का यह कदम संकेत देता है कि मतदाता सूची से जुड़ा काम बेहद संवेदनशील माना जा रहा है और किसी भी तरह की गड़बड़ी से बचने के लिए न्यायपालिका सीधे निगरानी कर रही है।
डेटा और विसंगतियों पर क्या फैसला लिया गया?
बैठक में यह तय किया गया कि 21 फरवरी की मध्यरात्रि तक ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ यानी तथ्यगत असंगतियों से जुड़ा जो डेटा उपलब्ध कराया गया था, उसी को अंतिम आधार माना जाएगा। चुनाव आयोग अब उसी आधार पर आधिकारिक संख्या जारी करेगा। साथ ही शेष न्यायिक अधिकारियों को जल्द लॉग-इन आईडी देने का निर्णय लिया गया ताकि काम की गति बढ़ सके और तकनीकी देरी खत्म हो।
दस्तावेज अपलोड और निगरानी कैसे होगी?
बैठक में यह भी तय हुआ कि 14 फरवरी तक जमा किए गए लेकिन पोर्टल पर अपलोड नहीं हुए दस्तावेजों को निर्धारित समय सीमा के भीतर अपलोड किया जाएगा। विधानसभा-वार तैनात न्यायिक अधिकारी रोजाना अपनी प्रगति रिपोर्ट चुनाव आयोग के माध्यम से हाई कोर्ट को भेजेंगे। इससे पूरी प्रक्रिया पर सीधी न्यायिक निगरानी बनी रहेगी।