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Bengal: बंगाल में 45 दिन में 7वां वेतन आयोग के लागू वादे पर सियासी बहस, टीएमसी-वामपंथी बोले- यह केवल भ्रामक

Wed, 04 Mar 2026 07:58 AM IST
Shubham Kumar एन. अर्जुन

सार

केंद्र ने बंगाल में भाजपा सरकार बनने पर 45 दिन में 7वां वेतन आयोग लागू करने का वादा किया। सरकारी कर्मचारी और छात्र इसे लेकर चर्चा में हैं, जबकि टीएमसी और वामपंथी इसे चुनावी रणनीति और भ्रामक करार दे रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषक इसे प्रतीकात्मक बदलाव का संकेत मानते हैं।

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी - फोटो : ANI
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विस्तार
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पश्चिम बंगाल की राजनीति में 45 दिन की समय सीमा नई बहस का केंद्र बन गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हालिया बंगाल दौरे के दौरान घोषणा की थी कि अगर राज्य में भाजपा की सरकार बनती है तो 45 दिनों के भीतर सातवां वेतन आयोग लागू कर दिया जाएगा। साथ ही अधिकतम आयु सीमा में पांच वर्ष की छूट और दिसंबर से प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू करने का संकेत भी दिया गया। इस बयान के बाद राज्य के सरकारी कर्मचारियों, शिक्षक समुदाय और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के बीच व्यापक चर्चा छिड़ गई है।

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वामपंथी और तृणमूल समर्थित कर्मचारी संगठनों ने इस घोषणा को चुनावी रणनीति करार दिया है। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे भ्रामक करार दिया है। लेकिन राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि जहां राज्य के कर्मचारी वर्तमान में डीए के लिए आंदोलनरत हैं, ऐसे में 45 दिनों की समय सीमा का वादा कर्मचारियों की आकांक्षाओं को सीधे संबोधित करता है। राजनीतिक विशेषज्ञों की क्या है राय राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बंगाल में लाखों सरकारी कर्मी व उनके परिवार एक बड़ा मतदाता वर्ग है। ऐसे में 45 दिन का वादा प्रतीकात्मक रूप से त्वरित परिवर्तन का संदेश देता है।

मथुरापुर में अमित शाह ने की थी घोषणा
गृह मंत्री अमित शाह ने मथुरापुर में घोषणा की थी कि अगर बंगाल में भाजपा की सरकार बनती है तो 45 दिनों के भीतर सातवां वेतन आयोग लागू कर दिया जाएगा। सभी रिक्त सरकारी पदों को भरने की प्रक्रिया 26 दिसंबर से प्रारंभ की जाएगी। भर्ती प्रक्रियाओं में हुई देरी के कारण अवसरों से वंचित युवाओं को पांच वर्ष की विशेष आयु सीमा में छूट दी जाएगी। साथ ही पारदर्शी और मेरिट आधारित भर्ती प्रणाली लागू की जाएगी।
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भाजपा समर्थित कर्मचारी संगठनों ने इसे साहसिक और समयबद्ध प्रतिबद्धता बताया है। वाम और तृणमूल समर्थित संगठनों का कहना है कि यह चुनावी वादा है।

सीएम ममता बोली- प्रक्रिया पहले ही हो चुकी पूरी
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने घोषणा को भ्रामक बताते हुए खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पहले ही वेतन आयोग की प्रक्रिया पूरी कर चुकी है और कर्मचारियों के लिए कैशलेस स्वास्थ्य योजना व पारंपरिक पेंशन व्यवस्था जारी है। भाजपा शासित राज्यों में पुरानी पेंशन व्यवस्था समाप्त की गई, जबकि बंगाल में इसे बरकरार रखा गया है।

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