पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में रिकॉर्ड मतदान हुए हैं। कई सर्वे एजेंसियों ने अपने एग्जिट पोल के अनुमान जारी कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या तृणमूल कांग्रेस इस बार भी सत्ता को बनाए रखने में कामयाब हो पाएगी या भाजपा पहली बार भद्रलोक कहे जाने वाले बंगाल में अपने दम पर राजनीतिक पैठ बनाने में सफल रहेगी। 2021 के चुनाव में अनुमानों के उलट नतीजे आए थे। ममता बनर्जी बीते 15 साल से बंगाल में मुख्यमंत्री हैं। खेला होबे जैसे चुनावी नारे के साथ भाजपा को पटखनी देने वाली सीएम ममता और उनके प्रत्याशियों के राजनीतिक भविष्य को लेकर कैसे अनुमान सामने आए हैं?
बंगाल में कौन कितना दमदार, एग्जिट पोल अनुमान क्या?
पांच साल के बाद 2026 चुनाव में किस्मत आजमा रहे प्रत्याशियों और दलों की क्या स्थिति रहेगी? ममता बनर्जी की पार्टी- तृणमूल कांग्रेस के राजनीतिक चिह्न- दो पत्तियों के मुकाबले भाजपा के चुनावी निशान कमल में कौन कितना दमदार है? इतिहास में हुई सर्वाधिक वोटिंग के बाद सर्वे एजेंसियों राज्य की जनता का मिजाज कैसा है? क्या बंगाल की जनता बदलाव का मूड बना चुकी है? बंगाल की स्थानीय मीडिया की तरफ से जारी एग्जिट पोल आंकड़ों के आधार पर ऐसे तमाम सवालों के जवाब तलाशने का प्रयास। ग्राउंड जीरो पर बंगाल की सियासी बयार क्या संकेत दे रही है? जानिए इस खबर में
SAS ग्रुप का सर्वे
| पार्टियों के नाम |
सीटें (अनुमानित) |
| तृणमूल कांग्रेस+ |
170 – 190 |
| भाजपा |
120 – 130 |
| कांग्रेस |
1 – 4 |
| सीपीएम |
0 – 2 |
| अन्य |
1 – 5 |
ताजा टीवी
| पार्टियों के नाम |
सीटें (अनुमानित) |
| तृणमूल कांग्रेस+ |
175 – 205 |
| भाजपा |
80 – 105 |
| अन्य |
0 – 5 |
कोलकाता न्यूज / आर-प्लस / पीपल्स पल्स
| पार्टियों के नाम |
सीटें (अनुमानित) |
| तृणमूल कांग्रेस+ |
177 – 187 |
| भाजपा |
95 – 110 |
| अन्य |
1 – 4 |
एसएएस सर्वे एजेंसी क्या है?
दक्षिण भारत के कुछ लोगों ने हैदराबाद में इसकी शुरुआत की। श्री आत्मा साक्षी ग्रुप (SAS) में शामिल लोग राजनीतिक सर्वेक्षणों के अलावा चुनावी विश्लेषण, एग्जिट पोल और रणनीतिक परामर्श जैसे काम भी करती है। इसका नेतृत्व भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) से डिग्री हासिल करने वाले पेशेवर करते हैं। पूरे भारत में जमीनी सर्वेक्षण का दावा करने वाली इस एजेंसी के पास 1,000 से अधिक प्रशिक्षित लोगों की टीम है।
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बंगाल में परिवर्तन की आहट: भाजपा को बढ़त, ममता के किले में सेंध
इससे पहले 29-30 अप्रैल को जारी कई अन्य सर्वे एजेंसियों के एग्जिट पोल अनुमानों में बदलाव की आहट दिखी। टुडेज चाणक्य के एग्जिट पोल ने पश्चिम बंगाल की सियासत में बड़े उलटफेर के संकेत दिए हैं। सर्वे ने भारतीय जनता पार्टी को 48% के भारी-भरकम वोट शेयर के साथ सबसे बड़ी शक्ति के रूप में उभरते हुए दिखाया है।
राजनीतिक गलियारों में परिवर्तन की सुनामी की चर्चा
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस के लिए यह रुझान चिंताजनक है, क्योंकि पार्टी 38% मतों के साथ भाजपा से करीब 10 प्रतिशत पीछे नजर आ रही है। राज्य में हुए रिकॉर्डतोड़ 92.93% मतदान के बाद आए इन आंकड़ों ने राजनीतिक गलियारों में परिवर्तन की सुनामी की चर्चा छेड़ दी है, क्योंकि इतना बड़ा वोट गैप सीटों के समीकरण में भाजपा को बहुमत के आंकड़े 148 से कहीं आगे ले जा सकता है।
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भाजपा को 192 सीट मिलने का अनुमान
अगर सीटों की बात करें तो सर्वे में 294 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा को 192 सीटों के साथ पूर्ण बहुमत मिलने का अनुमान जताया है। सर्वेक्षण के आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि राज्य में हुए रिकॉर्डतोड़ 93% मतदान ने परिवर्तन की ऐसी लहर पैदा की, जिसमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस महज 100 सीटों पर सिमटती नजर आ रही है।
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क्या एक दशक से अधिक पुराने शासन का अंत?
यदि 4 मई के परिणाम इन अनुमानों के अनुरूप रहते हैं, तो यह न केवल बंगाल में टीएमसी के एक दशक से अधिक पुराने शासन का अंत होगा, बल्कि भारतीय राजनीति के इतिहास में भाजपा की सबसे बड़ी वैचारिक और चुनावी जीत के रूप में दर्ज किया जाएगा।
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