क्यों जरूरी है योग
योग एक शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक अभ्यास है जो व्यक्ति को शांति, आत्मविश्वास और साहस प्रदान करता है। योग के माध्यम से हम कई गतिविधियों को बेहतर तरीके से कर पाते हैं। 'योग' शब्द संस्कृत से लिया गया है जिसका अर्थ है शामिल होना या एकजुट होना। योग के महत्व को समझते हुए आज पूरी दुनिया अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मना रही है, पर क्या आप जानते हैं 21 जून को ही अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस क्यों मनाया जाता है। आइए जानते हैं ऐसे ही सवालों के जवाब और इस दिन से जुड़े कुछ रोचक तथ्य जिनके बारे में अब तक शायद ही आपने कभी कुछ सुना हो।
योग शब्द का शाब्दिक अर्थ- जुड़ना या मिलना होता है लेकिन यह बहुत विस्तृत विज्ञान है क्योंकि इसके सभी कर्म और क्रियाएं मनुष्य को शारीरिक और आत्मिक रूप से पूर्ण योगी बनाती है। वेदांत के अनुसार, "आत्मा का परमात्मा से पूर्ण रूप से मिलन होना ही योग कहलाता है।"
क्या है योग का इतिहास
योगिक कथाओं के अनुसार योग का पहला प्रसार शिव द्वारा उनके 7 शिष्यों के बीच किया गया। कहते हैं कि इन 7 ऋषियों को ग्रीष्म संक्रांति के बाद आने वाली पहली पूर्णिमा के दिन योग की दीक्षा दी गई थी, जिसे शिव के अवतरण के तौर पर भी मनाते हैं। इस दौर को दक्षिणायन के नाम से जाना जाता है। इस दौरान आध्यात्मिक साधना करने वाले लोगों को प्रकृति की तरफ से स्वत: सहयोग मिलता है।
21 जून को ही क्यों मनाया जाता है 'अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस'
कई लोगों के मन में यह सवाल जरूर उठता है कि आखिर 21 जून को ही योग दिवस के रूप में क्यों मनाया जाता है। इसके पीछे की वजह भी काफी खास है। इस दिन उत्तरी गोलार्द्ध का सबसे लंबा दिन है, जिसे कुछ लोग ग्रीष्म संक्रांति भी कहकर बुलाते हैं। भारतीय परंपरा के अनुसार ग्रीष्म संक्रांति के बाद सूर्य दक्षिणायन हो जाता है। कहा जाता है कि सूर्य के दक्षिणायन का समय आध्यात्मिक सिद्धियां प्राप्त करने में बहुत लाभकारी होता है इसी वजह से 21 जून को 'अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस' के रूप में मनाते हैं।