अब उनके गुजर जाने के बाद गोवा की सियासत एक बार फिर गर्माने वाली है। खासकर तब जब लोकसभा के चुनाव को लेकर हलचलें तेज हैं और पार्टी यहां की 2 सीटों के लिए तो आश्वस्त रही ही है कि परिकर के रहते वो दोनों भाजपा के खाते में आएगी। लेकिन अब नए मुख्यमंत्री की बात हो या फिर आने वाले चुनावों की, गोवा में भाजपा के लिए परिकर का जाना एक बड़ा झटका है। हालांकि पिछले दिनों जब से राफेल का मुद्दा सियासत में गर्माने लगा और ये खबर भी उड़ी कि परिकर के पास राफेल की फाइलें हैं और उनसे सच सामने आने का खतरा है तब पार्टी के लिए एक मुश्किल जरूर खड़ी हो गई थी। लेकिन इस बारे में तमाम तथ्य अपने साथ लिए पूर्व रक्षामंत्री और ईमानदारी की मिसाल मनोहर परिकर अब हमेशा के लिए खामोश हो गए।
आज भाजपा का हर नेता मनोहर परिकर को याद करते हुए यह कहने से बाज नहीं आ रहा कि वो सादगी के मिसाल थे, वो बेहद ईमानदार और सरल थे, और तो और हवाई चप्पल पहनकर कहीं भी चले जाते थे, सूट बूट की संस्कृति से एकदम दूर थे। आखिर जब आप मनोहर परिकर की इन तमाम खूबियों को इतना पसंद करते हैं, आम लोगों को बढ़ चढ़ कर अपने इस नेता की ये खूबियां बताते हैं तो भला आप अपने जीवन में भी यह सादगी क्यों नहीं ला सकते। क्या ये जरूरी है कि देश में ईमानदार और सादगी वाले नेता सिर्फ मनोहर परिकर ही हो सकते हैं। अगर आप उनसे ऐसा कुछ भी सीख सकते हैं या जीवन में उतार सकते हैं तो उतार लीजिए, शायद यही परिकर साहब को असली श्रद्धांजलि होगी।