एनजीटी ने ब्यास और सतलुज नदी में औद्योगिक प्रदूषण की रोकथाम करने में नाकाम पंजाब सरकार पर 50 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। प्रधान पीठ ने कहा है कि गुरुदासपुर स्थित चीनी मिल और जालंधर और लुधियाना में मौजूद अन्य उद्योगों के जरिये लगातार नदियों को प्रदूषित किया जा रहा है। प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों से जुर्माने की रकम दो हफ्ते में वसूलने का आदेश दिया है।
जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने वकील अंबर सचदेवा की याचिका पर यह फैसला सुनाया। गुरुदासपुर जिले में हरिकै बैराज पर ब्यास नदी में मृत मछलियों के तैरने और जल जीवों के मरने का मामला सामने आने के बाद ट्रिब्यूनल में यह याचिका दाखिल की गई थी।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि जालंधर-लुधियाना में मौजूद कपड़ा रंगाई और साइकिल बनाने वाली औद्योगिक इकाइयों के अलावा गुरुदासपुर की चीनी मिलों से लगातार औद्योगिक कचरे नदियों में छोड़ा जा रहा है। वहीं, हरिकै बैराज से निकलने वाली नहरों का प्रदूषित पानी राजस्थान जाता है, जिससे राजस्थान के करीब आठ जिले प्रभावित हैं। राजस्थान सरकार भी इस पर आपत्ति जता चुकी है।