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अर्द्धसैनिक बल के शहीदों के परिजनों को भी अब सेना जैसी सुविधा

Wed, 28 Sep 2016 04:43 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : amar ujala
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आतंकवाद और उग्रवाद विरोधी कार्रवाइयों में जान न्योछावर करने वाले केंद्रीय अर्द्धसैनिक बल (सीपीएमएफ) के जवान और अधिकारी अब सिर्फ शहीद ही नहीं कहलाएंगे बल्कि उनके परिवार को सेना के बराबर की सुविधा और आर्थिक मुआवजा मिलेगा। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने सीपीएमएफ के लिए भी बैटल कैजुअल्टी सर्टिफिकेट (बीसीसी) जारी करने का फैसला किया है।
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स्वतंत्रता सेनानी शहीद भगत सिंह की पुण्यतिथि के एक दिन पहले सरकार का यह कदम सीपीएमएफ  की हौसला अफजाई का बड़ा कदम माना जा रहा है। सुरक्षा बलों के लिए बीसीसी जारी करने की मांग लंबे समय से की जा रही थी। मंगलवार को गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने सीमा सुरक्षा  बल (बीएसएफ) का महानिदेशक के साथ हुई बैठक में यह फैसला लिया है।

गृह मंत्री ने कहा कि इसे जल्द ही लागू कर दिया जाएगा। अब तक कश्मीर, पूर्वोत्तर के राज्यों और नक्सल प्रभावित इलाकों में तैनात अर्द्धसैनिक बलों के मारे जाने वाले जवान को शहीद तो कहा जाता था लेकिन उनके परिवार को वह सुविधा नहीं मिलती थी जो सेना के शहीदों के परिवार को मिलती  है।
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सरकारी नियम और  कानून  के मुताबिक बैटल कैजुअल्टी सर्टिफिकेट सिर्फ फौज से शहीदों को जारी की जाती है। गृह मंत्रालय के मुताबिक सीपीएमएफ के लिए इस सुविधा को अमली जामा पहनाने का काम जल्द शुरू होगा। 
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घुसपैठ पर राजनाथ का कड़ा रुख, बीएसएफ को सख्त निर्देश

- फोटो : getty
गौरतलब है कि देश में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ), असम रायफल्स, नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (एनएसजी), भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) केंद्रीय अर्द्धसैनिक बल की श्रेणी में आते हैं। इन सातों बलों की संख्या करीब एक लाख है। 

गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने बीएसएफ को सीमा से होने वाले घुसपैठ पर जीरो टॉलरेंट की पॉलिसी अपनाने का निर्देश दिया है। मंगलवार को बीएसएफ महानिदेशक के के शर्मा और गृहसचिव राजीव महर्षि के साथ हुई बैठक में राजनाथ सिंह ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कहा कि सीमा पार की घुसपैठ के लिए बल के भीतर जिम्मेदारी तय करने की जरूरत है।

अब बीएसएफ की  इस दलील से काम नहीं चलेगा कि घुसपैठ के जगह का पता नहीं चल पाया या फिर घुसपैठ कहीं और से हुई है। गौरतलब है कि पठानकोट आतंकी हमले के बाद बीएसएफ  ने यह कह पल्ला झाड़ लिया था कि घुसपैठ उस इलाकेसे नहीं हुई जहां उनके बल तैनात हैं।
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