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बैंकों ने जारी किए किसानों को नोटिस, बेचैन हुए धरतीपुत्र

Sat, 24 Sep 2016 03:19 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, झांसी
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- फोटो : अमर उजाला
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सूखे से फसल बर्बाद होने के बाद जिले के अधिकतर किसानों को सरकार से मुआवजा तो मिल नहीं सका, लेकिन अब बैंकों ने कर्ज वसूली की योजना बना ली है। किसानों के सामने अभी दो वक्त की रोटी का संघर्ष है और उनसे वसूली करने को बैंक प्रबंधन ने नोटिस जारी कर दिए हैं। सरकार ने वसूली पर 30 सितंबर तक रोक लगाई थी, लेकिन अभी तक इसकी मियाद बढ़ाने का शासन की ओर से कोई आदेश नहीं आया है।
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मऊरानीपुर के ग्राम कचीर के किसान काशीप्रसाद ने 07 नवंबर 2011 को सर्व यूपी ग्रामीण बैंक से किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के जरिये 95,000 रुपये का कर्ज लिया था। कुदरत की मार ने उन्हें मुसीबत में डाल दिया। कभी अतिवृष्टि, कभी ओलावृष्टि तो कभी सूखे ने उनके खेतों को बेजार कर दिया। इस बार उन्होंने अपने खेत में तिली बोई थी, लेकिन यहां भी वह कुदरत के आगे बेबस हो गए।

ज्यादा बारिश की वजह से तिली की फसल बर्बाद हो गई। काशीप्रसाद का कहना है कि खेती में लगातार हो रहे नुकसान की वजह से घर में खाने के लाले पड़े हैं, ऐसे में वह बैंक से लिए गए कर्ज की अदायगी कैसे कर पाएगा। अब बैंक से उन्हें नोटिस मिला है, जिसमें ब्याज समेत उन पर कर्ज 1,00,773 रुपये दर्शाया गया है। वह परेशान हैं।
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'नोटिस दिए हैं, दबाव नहीं डाला'

यह केवल कृषक काशीप्रसाद की दशा नहीं है, बल्कि जिले के हजारों किसानों की है, जिन पर बैंकों के कर्ज की वसूली का संकट मंडरा रहा है। बुंदेलखंड के आपदाग्रस्त किसानों से वसूली पर लगा प्रतिबंध 30 सितंबर 2016 को खत्म होने वाला है।

इस रोक को बढ़ाने के संबंध में शासन से अब तक कोई निर्देश आए नहीं है। ऐेसे में बैंक किसानों के पास फंसी अपनी रकम को निकालने की तैयारी में जुट गए हैं। जाहिर है कि छोटे और मझोले किसानों के सामने बड़ी मुसीबत खड़ी है।

साल दर साल बढ़ रहा है कर्ज
वर्ष               कर्ज (अरब में)
2011-12      2.68
2012-13      3.67
2013-14      5.48
2014-15      6.27
2015-16      8.62

किसानों को कर्ज की अदायगी के लिए केवल नोटिस जारी किए गए हैं। उन पर किसी तरह का दबाव नहीं बनाया जा रहा है। समय पर ऋण की अदायगी में किसानों को ही फायदा है। उन्हें महज चार फीसदी ब्याज देना होता है। जबकि, अनियमित रूप से कर्ज चुकाने पर ब्याज बढ़कर तेरह फीसदी तक पहुंच जाता है। इसके अलावा कर्ज न चुकाने पर वह फसल बीमा के लाभ से भी वंचित रह जाते हैं। 
- वाईएस यादव, वरिष्ठ प्रबंधक - सर्व यूपी ग्रामीण बैंक 
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खाने के हैं लाले, कर्ज कैसे चुकाएंगे

- फोटो : underpaidgenius
उत्पीड़न कतई नहीं होने देंगे 
किसानों से वसूली 30 सितंबर तक प्रतिबंधित है, इस अवधि को आगे बढ़ाने के संबंध में अब तक शासन से कोई नये निर्देश नहीं आए हैं। कृषि ऋण से संबंधित विधिक देयों की वसूली के लिए किसानों के प्रति उत्पीड़नात्मक कार्रवाई नहीं होने दी जाएगी। नोटिस जारी करना बैंकों की अपनी प्रक्रिया है। राजस्व विभाग की ओर से वसूली के संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
- पीएस शुक्ला, अपर जिलाधिकारी  

फसल लगातार बर्बाद हो रही है। रबी के बाद खरीफ सीजन भी किसानों को धोखा दे गया। खेत-खलिहान खाली पड़े हैं। किसानों के पास खाने तक को नहीं है। उन्हें अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए साहूकारों के सामने हाथ फैलाने पड़ रहे हैं। ऐसे में वह बैंकों का कर्ज कैसे चुका पाएंगे। बैंकों की कर्ज वसूली की प्रक्रिया को संज्ञान में लेते हुए सरकार को सख्त कदम उठाने चाहिए।
- शिवनारायण सिंह परिहार, किसान नेता
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