अमर उजाला से खास बातचीत में कोलकाता इस्कॉन के वाइस प्रेसिडेंट, राधा रमण दास ने बांग्लादेश में हो रही हिंसा पर अपनी बात रखी हैं। बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति और देश में अंतरिम सरकार के गठन के बावजूद भी हालात अभी सामान्य होते नहीं दिख रहे हैं। इस पर राधा रमण दास ने कहा कि बांग्लादेश में स्थिति बहुत ही दुखद है जब भी मैं फोन करता हूं बांग्लादेश से दिल को दहला देने वाली खबरें आती है, एक दिन पहले भी वहां पर हिंदू बहुल दो गांव को जला दिया गया।
'बांग्लादेश में मानवाधिकारों का हो रहा हनन'
हमने देखा कि दो दिन पहले हिंदूओं ने ढाका, चटगांव और अन्य शहरों में प्रदर्शन किया, चटगांव में 7 लाख हिंदू वो घरों से निकलकर बाहर आए और उन्होंने अपनी मांगें रखी, और सरकार से सुरक्षा की प्रदान करने की मांग की, कि वो सुरक्षित नहीं है। लेकिन इसके बाद यह भी खबर आई कि रैली के बाद जब सभी अपने-अपने घर गए तो उन लोगों को निशाना बनाया गया। उनके घरों पर आक्रमण किया गया और उनको मारा-पीटा गया और ये कहा गया कि और इनको ऐसा सबक सिखाओ कि फिर से रैली ना कर सके। तो इस तरह से बांग्लादेश में मानवाधिकारों का हनन हो रहा है। बांग्लादेश में जो हिंदू हैं उनकी स्थिति, मरता क्या ना करता जैसी है।
बांग्लादेश में हो रहा जातीय संहार- राधा रमण दास
आजादी के समय जब पाकिस्तान बना था उस समय भी वहां पर बंगाली हिंदुओं की संख्या लगभग 30 प्रतिशत थी जो घटकर मात्र सात प्रतिशत रह गई है। अब बताइए कौन सा ऐसा देश है जहां पर जनसंख्या कम होती है, सभी जगह लोगों की जनसंख्या बढ़ रही है और यहां पर हिंदुओं की संख्या कम हो रही है। इसका कारण भी हम जानते हैं अगर आप हर दिन बांग्लादेश की खबरें पढ़ेंगे तो वहां हर दिन किसी हिंदू लड़कियों के अपहरण और हिंदुओं के हत्या की खबरें मिलती है। बांग्लादेश में जातीय संहार हो रहा है।
'बांग्लादेश में सिर्फ हिंदू ही बलि का बकरा बनता है'
बांग्लादेश में कौन कट्टरपंथी है कौन हिंदुओं के साथ में है यह सब बातें पीछे रह जाती हैं, जब वहां गांव के गांव एक साथ जला दिए जाते हैं। जिस देश से वहां की प्रधानमंत्री को भी देश छोड़कर भागना पड़े। जिस देश में चीफ जस्टिस को इस्तीफा करना पड़ा तो ऐसे तो स्थिति है। हमें उनके अंदरुनी राजनीति के बारे में पता नहीं, लेकिन हिंदू की जान क्यों जाएगी, हिंदू क्यों मारे जाएंगे। पहले दिन जब प्रधानमंत्री शेख हसीना वो जब भारत चली आई, उसी रात को हम लोग तो बहुत सतर्क थे, हमें वैसे ही आशंका हो जाती है क्योंकि बांग्लादेश अगर कोई चुनाव जीतता है, तब भी हिंदू मरते हैं कोई चुनाव हारता है तब भी हिंदू मरते हैं। तो कोई भी घटना होती है हिंदू को ही बली का बकरा बनना पड़ता है।
'बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति कभी भी अच्छी नहीं रही'
बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति कभी भी अच्छी नहीं रही, बांग्लादेश में इतने दिनों से ये घटना क्रम चल रहा था, तो देखा गया कि किसी ने कोई आवाज नहीं उठाई, तो उसी समय मैंने प्रधानमंत्री के निवास में फोन किया और फिर उसके बाद में अगले दिन ही मैं हमारे जितने भी कोलकाता के ब्रह्मचारी हैं उनको लेकर मैंने बांग्लादेश एंबेसी का घेराव किया। मैं यूनाइटेड नेशन को चिट्ठी भी लिखी। 150 देशों में इस्कॉन के लोगों ने प्रदर्शन किया, जिसके बाद 50 देशों ने पहली बार इसकी आलोचना की।
'बांग्लादेश में तैनात की जाए यूएन की पीसकीपिंग फोर्स'
मेरा मानना है कि ये भारत और बांग्लादेश का आंतरिक मामला है, इसका समाधान भारत सरकार को करना चाहिए। हमारे देश में चार करोड़ रोहिंग्या और अवैध बांग्लादेशी रहते हैं, यह सभी जानते हैं सुप्रीम कोर्ट के पास भी ये आंकड़ा है। फिलहाल मैं उम्मीद करता हूं वहां के कार्यवाहक नेता मोहम्मद यूनुस पूरे मामले को संभालेंगे। हाल ही में उन्होंने आश्वासन दिया है कि अगर अल्पसंख्यकों के खिलाफ दंगा नहीं रुका, तो वो अपने पद से इस्तीफा दे देंगे। जबकि इसे लेकर मैंने यूनाइटेड नेशन को लिखे ईमेल डिमांड की है कि यूनाइटेड नेशन की पीसकीपिंग फोर्स को तत्काल बांग्लादेश में तैनात करना चाहिए।