इस्कॉन के प्रवक्ता राधारमण दास
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इस्कॉन के प्रवक्ता राधारमण दास ने कहा है कि बांग्लादेश में पिछले 24 घंटों से किसी भक्त या फिर किसी धार्मिक स्थल पर हमले की खबर नहीं मिली है। हम चाहते हैं कि यह सिललिसा ऐसे ही आगे भी बरकरार रहे। यह विदेश सचिव के दौरे का नतीजा ही है। अमर उजाला से खास बातचीत में दास ने कहा, लेकिन जिस तरह से बांग्लादेश में कुछ कट्टरपंथी, इस्कॉन को कैंसर बता कर उसे काट कर फेंकने की बात कर रहे हैं, उससे चिंता बढ़ गई है। उन्होंने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचसीआर) से बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर
हो रहे अत्याचारों पर ध्यान देने का आह्वान किया।
दिख रहा है विदेश सचिव के दौरे का असर
दास ने कहा, विदेश सचिव विक्रम मिस्री के दौरे का असर दिखने लगा है। उन्होंने कहा, पिछले 24 घंटों से किसी तरह की हमले की खबर हमें नहीं मिली है। लगता है कि विदेश सचिव की बात बांग्लादेश की अंतरिम सरकार को समझ आ गई है। यह एक सकरात्मक खबर है। हम चाहते हैं कि इसी तरह से यह 24 फिर 48 और 72 घंटे हों और हमलों का सिलसिला फिर रुक जाए। हालांकि, अभी भी वहां के हिंदुओं और अल्पसंख्यकों में भय का माहौल है।
लेकिन अभी खतरा टला नहीं है
बांग्लादेश के संवेदनशील हालात का जिक्र करते हुए दास ने कहा, जिस तरह से बांग्लादेश से कुछ कट्टरपंथियों की वीडियो समाने आ रही हैं, वह चिंता बढ़ाने वाली हैं। मुफ्ती रफिकुल इस्लाम मदनी जैसे कट्टरपंथी नेता इंस्कॉन को कैंसर बता कर काट फेंकने की बात कर रह हैं। उन्होंने कहा कि इन नेताओं के बांग्लादेश में लाखों की संख्या में फलोअर्स हैं। अगर लोग इनके भड़काउ भाषण की गिरफ्त में आ गए तो वहां पर हिंदुओं और अल्पसंख्यों पर फिर जुल्म बढ़ सकते हैं। उन्होंने कहा, तब वहां की पुलिस और सेना स्थिति को संभालने की स्थिति में नहीं होगी। उन्होंने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार से ऐसे लोगों को तुरंत कार्रवाई करने की मांग की है। ताकि फिर से किसी तरह का अल्पसंख्यकों पर नहीं हो।
जागो यूएन मानवाधिकार परिषद जागो
राधारमण दास ने कहा, मंगलवार को उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस पर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार परिषद को जगने की अपील की है। उन्होंने कहा, आज मानवाधिकार दिवस है, जागो यूएन मानवाधिकार परिषद जागो। कम से कम मानवाधिकार दिवस के मौके पर तो जागो। बांग्लादेश में मानवाधिकारों के उल्लंधन पर अपनी चुप्पी और आंखे बंद रखना दुखद है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका, ब्रिटेन जैसे देशों के सांसद बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, लेकिन यूएनएचसीआरको ने अभी तक मानवाधिकार के उल्लंघन पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।