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साक्षात्कार: जलमार्ग नया नहीं, हमारी परंपरा का हिस्सा; सोनोवाल बोले- जलवायु परिवर्तन की समस्या से निपटना मकसद

सार

देश में जलमार्ग और जल परिवहन के संदर्भ में पूछे जाने पर केंद्रीय मंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने कहा, पिछले 10 वर्षों में मोदी सरकार ने इस क्षेत्र में जबरदस्त काम किया है। सागरमाला प्रोजेक्ट के तहत 2035 तक लगभग 5.79 लाख करोड़ रुपये के निवेश की 839 परियोजनाएं हैं। इनमें से 1.40 लाख करोड़ की 262 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं और 1.65 लाख करोड़ की 217 परियोजनाओं पर काम जारी है।
 
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केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारत अपने पांच हजार साल पुराने गौरवशाली जलमार्ग की परंपरा को वापस लाने और कार्बन उत्सर्जन व जलवायु परिवर्तन की समस्या से निपटने के लिए सड़क और रेल के बजाय जलमार्गों को बढ़ावा दे रहा है। यह कहना है केंद्रीय बंदरगाह और जहाजरानी व जल मंत्री सर्बानंद सोनोवाल का।

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देश में जलमार्ग और जल परिवहन के संदर्भ में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, पिछले 10 वर्षों में मोदी सरकार ने इस क्षेत्र में जबरदस्त काम किया है। सागरमाला प्रोजेक्ट के तहत 2035 तक लगभग 5.79 लाख करोड़ रुपये के निवेश की 839 परियोजनाएं हैं। इनमें से 1.40 लाख करोड़ की 262 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं और 1.65 लाख करोड़ की 217 परियोजनाओं पर काम जारी है। इनके अलावा तटीय जिलों के समग्र विकास के तहत लगभग 58,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली कुल 567 परियोजनाओं की पहचान की गई है। भारत में आने वाला समय जल परिवहन का है।

इस क्षेत्र में हुई तरक्की के बारे में सोनोवाल ने कहा, चेन्नई-रूस के बीच 10,458 किमी का मार्ग, जिसे ईएमसी नाम से जाना जाता है, रूस के पूर्वी तट को दक्षिण भारत से जोड़ता है। इससे जिस सफर में पहले 40 दिन का समय लगता था अब 20 दिन लगता है। 5,608 किमी की दूरी घटी है और दोनों देश के मध्य कार्गो परिवहन की क्षमता बढ़ी है।
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कार्बन उत्सर्जन शून्य करने के लिए प्रतिबद्ध
सोनोवाल ने कहा, जलमार्ग नया नहीं, हमारी परंपरा का हिस्सा है। भारत का जोर माल परिवहन के लिए जल को महत्व देने पर है। मोदी सरकार का लक्ष्य प्रदूषण को रोकने, कार्बन उत्सर्जन को शून्य करने और निर्बाध परिवहन को सुनिश्चित करने पर है। इसके लिए जल परिवहन से बेहतर कुछ नहीं हो सकता।

विस्तृत जलमार्ग के निर्माण पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार का जोर ऐसे विस्तृत जलमार्ग के निर्माण पर है, क्योंकि देश में 5,200 किमी नदियां और चार हजार किमी नहरें हैं। विस्तृत जलमार्ग के प्रयोग से जलवायु परिवर्तन के संकट से निपटने में मदद मिलेगी।

कांग्रेस की सरकारों में हुई अनदेखी
कांग्रेस की सरकारों ने अपने 60 साल के शासन में 7,500 समुद्र तट और 20,000 किमी अंतर्देशीय जलमार्ग की अनदेखी की, जिसका खामियाजा देश ने भोगा है, जबकि यह नया नहीं 5000 साल पहले भारत जलमार्ग में दुनिया का सिरमौर था। मौजूदा समय में जलमार्ग में बड़ी संभावना है।

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