बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने मंगलवार को दिल्ली में 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में मारे गए या गंभीर रूप से घायल हुए भारतीय सैनिकों के वंशजों के लिए मुजीब छात्रवृत्ति की घोषणा की। उन्होंने कहा कि ये पुरस्कार बुधवार को प्रदान किए जाएंगे। इस पुरस्कार का नाम हसीना के पिता बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान के नाम पर रखा गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय सेना के जवानों के परिवार के कुल 200 सदस्यों को स्कॉलरशिप मिलेगी।
इस छात्रवृत्ति की घोषणा करते हुए बांग्लादेश की पीएम ने कहा कि हम 1971 में बांग्लादेश की मुक्ति के महान युद्ध में सरकार और भारत के लोगों के बहुमूल्य समर्थन के लिए आभारी हैं, जो हमारे द्विपक्षीय संबंधों में एक महत्वपूर्ण क्षण था। उन्होंने आगे कहा कि कल मैं बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान शहीद या गंभीर रूप से घायल हुए भारत के रक्षा बलों के सैनिकों या अधिकारियों के वंशजों को मुजीब छात्रवृत्ति प्रदान करूंगी। गौरतलब है कि बांग्लादेशी सरकार के अनुसार, बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में कम से कम 1,984 भारतीय सेना के जवान मारे गए थे।
हसीना सरकार ने इससे पहले लेखकों और राजनेताओं सहित बांग्लादेश के स्वतंत्रता आंदोलन के अन्य भारतीय समर्थकों को भी सम्मानित किया था। इतना ही नहीं उन्होंने देश को आजाद कराने के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले सैनिकों को भी इसी तरह का सम्मान देने का प्रस्ताव रखा था।
गौरतलब है कि बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना चार दिवसीय भारत के दौरे पर हैं। उन्होंने यहां मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ से मुलाकात की। इससे पहले उन्होंने प्रसारण में सहयोग के लिए प्रसार भारती और बांग्लादेश टेलीविजन (बीटीवी) के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए थे।
भारत और बांग्लादेश ने पीएम मोदी और शेख हसीना के बीच बातचीत के बाद सात समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इसमें कुशियारा नदी के पानी को साझा करने पर एक समझौता शामिल है, जिससे दक्षिणी असम और बांग्लादेश में सिलहट के क्षेत्रों को लाभ होने की उम्मीद है।