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उपलब्धि: हवा में मौजूद जहरीली गैस से अलर्ट करेगा सस्ता देसी सेंसर, बंगलूरू के वैज्ञानिकों ने विकसित की तकनीक

Thu, 10 Jul 2025 07:30 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

नया सेंसर बंगलूरू स्थित नैनो और सॉफ्ट मैटर साइंसेज केंद्र के वैज्ञानिकों ने विकसित किया  है। इसे बनाने में निकेल ऑक्साइड व नियोडिमियम निकेलेट का इस्तेमाल किया गया है। इसमें निकेल ऑक्साइड गैस की पहचान करता है, जबकि नियोडिमियम निकेलेट उस संकेत को कुशलता से आगे ट्रांसमिट करता है। 
 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobe stock
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विस्तार
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बंगलूरू के वैज्ञानिकों ने कम लागत वाला ऐसा सेंसर विकसित किया है, जो हवा में मौजूद जहरीली सल्फर डाइऑक्साइड (एसओ2) गैस की रियल-टाइम पहचान कर सकता है। यह गैस सांस की बीमारियों से लेकर फेफड़ों की स्थायी क्षति तक का कारण बन सकती है।

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नया सेंसर बंगलूरू स्थित नैनो और सॉफ्ट मैटर साइंसेज केंद्र के वैज्ञानिकों ने विकसित किया  है। इसे बनाने में निकेल ऑक्साइड व नियोडिमियम निकेलेट का इस्तेमाल किया गया है। इसमें निकेल ऑक्साइड गैस की पहचान करता है, जबकि नियोडिमियम निकेलेट उस संकेत को कुशलता से आगे ट्रांसमिट करता है। इसकी खासियत यह है कि यह सेंसर 320 पार्ट्स पर बिलियन (पीपीबी) जितनी अल्प मात्रा में सल्फर डाइऑक्साइड को भी पहचान सकता हैै।

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इसलिए जरूरी है सेंसर
सल्फर डाइऑक्साइड एक घातक वायु प्रदूषक है, जो वाहनों, बिजली संयंत्रों और औद्योगिक इकाइयों से निकलता है। यह गैस अस्थमा, सांस की तकलीफ और फेफड़ों को नुकसान पहुंचाती है। मौजूदा निगरानी प्रणालियां या तो काफी महंगी हैं या फिर इतनी संवेदनशील नहीं कि कम स्तर के प्रदूषण को पकड़ सकें। इसी चुनौती को हल करने के लिए यह नई सेंसर प्रणाली सामने आई है।
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राष्ट्रीय स्तर पर निगरानी नेटवर्क की संभावना
वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर इस सेंसर का बड़े पैमाने पर निर्माण और वितरण किया जाए  तो भारत के शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों में एक कम लागत वाला वायु गुणवत्ता निगरानी नेटवर्क खड़ा किया जा सकता है। यह न केवल नीति निर्धारण में मदद करेगा बल्कि एनवायरनमेंटल इमरजेंसी सिस्टम का आधार भी बन सकता है। इसके साथ स्कूली शिक्षा,हेल्थकेयर और स्मार्ट सिटी मिशन में भी इसका समावेश संभव है।

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