भारतीय वायुसेना ने कार्रवाई पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में की है, जिसका उसे अधिकार है। यह दरअसल हमारा ही इलाका है। यह हिंदुस्तान की कूटनीतिक कामयाबी भी है। जमीन पाकिस्तान के कब्जे में है, पाकिस्तान की नहीं है।
भारत ने आतंकवादी ठिकानों पर कार्रवाई की है, जिसका पूरा विश्व समर्थन करता है। चीन पाकिस्तान के समर्थन में आ नहीं सकता। सुरक्षा परिषद में उसने आतंकवाद की निंदा प्रस्ताव पर दस्तखत किए हैं। चीन की अंदरूनी स्थिति भी अच्छी नहीं है। उसने पहले ही 10 लाख मुसलमानों को जेल में डाल रखा है।
सऊदी अरब के पास पर्याप्त सैनिक शक्ति नहीं है। उसने अपने शाही परिवार की रक्षा का काम पाकिस्तानी फौज के हवाले कर रखा है। उसका भारत को तेल निर्यात मुसीबत में पड़ जाएगा। सऊदी को भारत से भुगतान का संकट नहीं है। पाकिस्तान तो तेल की कीमत भी नहीं चुका सकता।
पाक अधिकृत कश्मीर में पहले से पाकिस्तान विरोधीआंदोलन चल रहे हैं।अब वे तेज हो जाएंगे। बलूचिस्तान में भी अलग होने के लिए आंदोलन तेज होगा।
आतंकवादी गुट पीओके से भाग कर अफगान सीमा पर जाएंगे। वहां नाटो फौज उन्हें नही छोड़ेगी।
पाकिस्तानी अवाम खुलकर मसूद अजहर, हाफिज सईद, सलाहुद्दीन जैसों का अब खुलकर विरोध करेगी। विरोध तो वह पहले से कर रही है।
पाकिस्तान सांप छछूंदर की स्थिति में है। इस हमले का विरोध भी नहीं कर सकता और पूर्ण युद्ध लड़ भी नहीं सकता और चुप बैठता है तो अपने ही मुल्क में हुकूमत की किरकिरी होगी। पाकिस्तान करे तो क्या करे?