महाराष्ट्र का बदलापुर कांड (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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बदलापुर यौन उत्पीड़न मामले की जांच कर रही एसआईटी (SIT) अब पीड़िताओं से आरोपी की पहचान कराएगी। इसके लिए कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने आरोपी की पहचान परेड कराई जाएगी। साथ ही एसआईटी आरोपी का मनोवैज्ञानिक प्रोफाइल भी तैयार करेगी। उधर, बच्चियों के यौन उत्पीड़न मामले में निलंबित ठाणे के एक शिक्षा अधिकारी ने बॉम्बे हाईकोर्ट से निलंबन आदेश पर रोक लगाने की मांग की। शिक्षा अधिकारी ने दावा किया कि सरकारी आदेश राजनीति से प्रेरित था और उसे बलि का बकरा बना दिया गया।
शिक्षा अधिकारी बालासाहेब रक्शे ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए अपील की। उन्होंने कहा कि कोर्ट महाराष्ट्र प्रशासनिक न्यायाधिकरण (एमएटी) के समक्ष उनकी याचिका की अंतिम सुनवाई होने तक निलंबन आदेश पर रोक लगाएं। वह राज्य सरकार को किसी की भी अन्य अधिकारी की नियुक्ति करने से रोकें।
रक्शे की याचिका दायर करने वाले वकील सतीश तालेकर और माधवी अय्यपन ने बताया कि मामले में न्यायमूर्ति ए एस चंदुरकर और राजेश पाटिल की खंडपीठ जल्द सुनवाई करेगी। इससे पहले राक्शे ने निलंबन आदेश पर रोक लगाने के लिए महाराष्ट्र प्रशासनिक न्यायाधिकरण से संपर्क किया था। उन्होंने दावा किया कि उसे 18 अगस्त को यौन उत्पीड़न की घटना के बारे में पता चला और उसने तुरंत अंबरनाथ ब्लॉक शिक्षा अधिकारी से संपर्क किया था। साथ ही ठाणे जिले के बदलापुर में स्कूल का दौरा करने, जांच करने और रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा था। खंड शिक्षा अधिकारी ने 20 अगस्त को रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। इसके बाद रक्शे ने स्कूल अध्यक्ष/सचिव/प्रधानाध्यापक को कारण बताओ नोटिस जारी किया। साथ ही स्कूल से खराब पड़े सीसीटीवी कैमरों पर स्पष्टीकरण मांगा गया।
उन्होंने सभी प्राथमिक, माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को सीसीटीवी, शिकायत पेटियां और एक छात्र सुरक्षा समिति स्थापित करने का भी निर्देश दिया था। रक्शे ने कहा कि इन कदमों को उठाने के बावजूद स्कूल शिक्षा मंत्री ने कहा कि ठाणे के शिक्षा अधिकारी रक्शे को निलंबित कर दिया गया है। उन्होंने याचिका में कहा कि उनका प्री-प्राइमरी केंद्रों के विनियमन और पर्यवेक्षण से कोई लेना-देना नहीं है।