बिहार में महागठबंधन टूटने और सीएम नीतीश कुमार के बीजेपी में शामिल होने की चर्चा हर तरफ हो रही है। गठबंधन के टूटने से विपक्षी पार्टियों में भी एक रोष दिखाई दे रहा है। इसी बीच नीतीश के इस कारनामे से झारखंड विकास मोर्चा के सुप्रीमो बाबू लाल मरांडी नाखुश हैं। मरांडी ने कहा कि बिहार के राजनीति का असर झारखंड में भी दिखाई दे सकता है।
बता दें कि जहां झारखंड विकास मोर्चा के सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी को मुख्यमंत्री का चेहरा पेश कर नीतीश झारखंड में भी महागठबंधन बनाने में जुटे थे। वहीं, उस गठबंधन पर पानी फिरता नजर आ रहा है। दरअसल, बिहार के तर्ज पर झारखंड में भी महागठबंधन बनाने की तैयारी चल रही थी।
उन्होंने कहा कि हमारा नीतीश कुमार के साथ व्यक्तिगत सम्बन्ध अच्छा है। उन्होंने जो कदम उठाया है वह बिहार के हालात के अनुसार उठाया है। लेकिन इसका किसी भी तरह का राजनीतिक असर झारखण्ड में नहीं पड़ने वाला है। हम दोनों ने यूपीए में रहते हुए राष्ट्रपति चुनाव में अलग अलग लोगों का समर्थन किया।
गौरतलब है कि शराबबंदी लागू करने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मई 2016 में नीतीश कुमार ने झारखंड का दौरा किया था। उन्होंने वहां एक कार्यक्रम मे हिस्सा लिया। कार्यक्रम में संबोधित करते हुए नीतीश कुमार ने झारखंड में भी शराबबंदी की आवाज उठाई थी। कुमार ने मंच से झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास से राज्य में शराबंदी लागू करने की मांग की थी।
वहीं, नीतीश मे मंच से यह भी ऐलान किया था कि अगर रघुवर दास शराबबंदी लागू नहीं करते हैं तो अगली बार 2019 में बाबूलाल मरांडी मुख्यमंत्री बनेंगे और महिलाओं की मांग को पूरा करेंगे। वह बाबूलाल को मुख्यमंत्री का चेहरा पेश कर झारखंड में भी बिहार की तर्ज पर भाजपा के खिलाफ महागठबंधन बनाने में जुटे थे। इसके लिए उन्होंने झारखंड में बाबूलाल के साथ कई जनसभाएं की थी। उन्होंने झाविमो, जदयू, राजद, कांग्रेस और छोटे-छोटे दलों को मिलाकर महागठबंधन बनाने की थी।