महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या की साजिश पुणे में रची गई थी। हमलावरों को उनकी पहचान करने के लिए एक फोटो और एक फ्लैक्स बैनर प्रदान किया गया था। पुलिस ने सोमवार को यह बात कही।
मुंबई पुलिस की अपराध शाखा ने 66 वर्षीय नेता की हत्या की जांच के दौरान पुणे निवासी प्रवीण लोनकर और उसके भाई शुभम लोनकर की कथित भूमिका का खुलासा किया। पुलिस अधिकारी ने कहा, हत्या किस मकसद से की गई थी, यह तभी स्पष्ट होगा जब फरार आरोपी गिरफ्तार किए जाएंगे। पुलिस ने लोनकर भाइयों को इस अपराध का मुख्य आरोपी माना है। दोनों ने कथित तौर पर हमलावरों की फंडिंग की और हमले से पहले बैठकें कीं।
अधिकारियों ने बताया कि प्रवीण, शुभम की डेयरी में काम करता था, जहां उसने शिवकुमार गौतम और धर्मराज कश्यप से संपर्क किया। ये दोनों एक नजदीक के स्क्रैप डीलर के यहां काम करते थे। साजिश के लिए कई दौर की बैठकें हुईं, जिसमें उन्हें काम को अंजाम देने के बाद पूरा भुगतान का वादा किया गया था। प्रत्येक हमलावर को पचास हजार रुपये पहले ही दे दिए गए थे। उन्होंने सिद्दीकी की दिनचर्या और घर का पता करने के लिए एक मोटरसाइकिल खरीदी।
प्रवीण लोनकर पर आरोप है कि उसने दो हमलावरों को सिद्दीकी को निशाना बनाने के लिए बुलाया और पुलिस ने उन्हें उसके सहयोगी के रूप में पहचाना है। पुलिस ने अब तक तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, जिसमें हरियाणा के गुरमेल बलजीत सिंह (23 वर्षीय), उत्तर प्रदेश के धर्मराज राजेश कश्यप (19 वर्षीय) और प्रवीण लोनकर शामिल हैं। पुलिस ने संदिग्ध हैंडलर मोहम्मद यासीन अख्तर और गौतम के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। गौतम पर आरोप है कि उसने बाबा सिद्दीकी के सीने में गोलियां मारी थीं।
पुलिस के मुताबिक, जांच में यह भी खुलासा हुआ कि गौतम ने तीन महीने पहले कश्यप को पुणे में काम करने के लिए बुलाया था। इसके बाद गौतम सितंबर 2023 में मुंबई के कुर्ला में विनोबा भावे नगर में किराए पर रहने लगा। जिसके बाद उसने गुरमेल बलजीत सिंह को साजिश में शामिल किया।
अधिकारी ने कहा, तीनों हमलावर गुरमेल सिंह, कश्यप और गौतम को 50-50 हजार रुपये की अग्रिम राशि दी गई थी। उन्होंने बाबा सिद्दीकी के कार्यालय और उनकी दिनचर्या की रैकी करने के लिए एक बाइक खरीदी। तीनों शनिवार रात तक अपने हैंडलर्स के साथ अपने मोबइल फोन से लगातार संपर्क में थे, जब सिद्दीकी को गोली मारी गई। गौतम ने सिद्दीकी पर गोलीबारी की, जबकि कश्यप और गुरमेल सिंह पीछे खड़े थे। कश्यप ने सिद्दीकी पर गोली लगने के बाद एक स्प्रे का इस्तेमाल किया। जबकि कश्यप और गुरमेल सिंह को बांद्रा में घटनास्थल से ही गिरफ्तार कर लिया गया। गौतम भागने में सफल रहा।