राजस्थान और केरल ने भी अपनी-अपनी योजनाओं का हवाला देकर इस योजना में शामिल होने को लेकर अनिच्छा जाहिर की थी। राजस्थान में भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत 4.5 करोड़ लोगों को कैशलेस सुविधा मिल रही है। लेकिन इसका लाभ 27 लाख लोगों को ही मिल पाया। राजस्थान ने भामाशाह योजना में 370 करोड़ का प्रीमियम बीमा कंपनियों को दिया था। इसके एवज में बीमा कंपनियों को 500 करोड़ का भुगतान करना पड़ा था। जिसके चलते राज्य सरकार ने प्रति कार्ड प्रीमियम की राशि बढ़ा कर 1200 रुपए के करीब कर दी है। वहीं राजस्थान में बीमा सुविधा दे रही कंपनियों का अनुबंध अगले साल तक है। भूषण ने बताया कि उनकी इस मुद्दे को लेकर राजे से बात हुई थी, लेकिन उनकी आपत्ति का निस्तारण कर दिया गया है।
मोदी का नाम जुड़े होने से कई राज्यों को थी परेशानी
केरल सरकार की भी अपनी योजना है, जो 35 लाख परिवारों को कवर रही है जबकि मोदीकेयर में केवल 19 लाख परिवार ही कवर होंगे। भूषण ने बताया कि स्कीम के लागू होने तक देश के सभी 29 राज्य इस योजना का हिस्सा होंगे। इससे पहले गैर भाजपा शासित राज्यों ने राजनीतिक कारणों से योजना में शामिल होने को लेकर हिचकिचाहट दिखाई थी। राज्यों को इस योजना में प्रधानमंत्री मोदी का नाम जुड़े होने पर आपत्ति थी।
छत्तीसगढ़, पश्चिमी बंगाल, झारखंड और मध्य प्रदेश से होगी शुरू
भूषण ने बताया कि कुछ दिन पहले ही कई राज्यों को आयुष्मान भारत योजना के सॉफ्टवेयर का डेमो दिया गया था और अभी तक कई राज्यों में इसका प्रयोग सफल रहा है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, झारखंड और मध्य प्रदेश सबसे पहले राज्य होंगे, जो इस योजना की शुरुआत करेंगे। पहले दो राज्य मिक्स मॉडल ट्रस्ट और इंश्योरेंस पर काम करेंगे, जबकि झारखंड इंश्योरेंस मॉडल और मध्य प्रदेश ट्रस्ट मॉडल पर काम करेगा।
भूषण ने बताया कि ट्रस्ट मॉडल में राज्य सरकारों ने कीमतें फिक्स कर दी हैं और इसमें कोई कीमत अलग से नहीं ली जाएगी। इस मॉडल को स्वास्थ्य बीमा के लिए आदर्श माना जाता है। वहीं मिक्स मॉडल में प्रीमियम अमाउंट बीमा कंपनियां वहन करती हैं, जबकि बाकी हिस्सा राज्य सरकारें वहन करेंगी।
6 हजार निजी अस्पताल शामिल
कैश लैस इलाज को लेकर प्राइवेट अस्पतालों की आपत्तियों पर भूषण ने बताया कि तकरीबन 6 हजार निजी अस्पतालों का इम्पैनलमेंट प्रोसेस शुरु हो चुका है। हालांकि उन्होंने नाम बताने से इंकार कर दिया लेकिन कहा कि इनमें से कुछ बड़े नामीगिरामी हॉस्पिटल्स भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि इस योजना में जिले के किस-किस प्राइवेट अस्पताल को शामिल किया जाएगा, इसका फैसला जिलाधिकारी द्वारा गठित कमेटी में लिया जाएगा। कमेटी के अध्यक्ष जिलाधिकारी ही होंगे।
नेशनल पोर्टेबिलिटी पर आसान हुई राह
उन्होंने बताया कि इस स्कीम में नेशनल पोर्टेबिलिटी की समस्या का भी समाधान निकाल लिया गया है। उन्होंने बताया कि नागालैंड में 440 रुपए का प्रीमियम प्रति परिवार आया है, अगर कोई शख्स दिल्ली के किसी अस्पताल में अपना इलाज कराता है, तो इसका खर्चा नागालैंड सरकार वहन करेगी और योजना के प्रारूप के तहत बाकी का जो अमाउंट होगा वह केन्द्र देगा।
95 फीसदी का लक्ष्य हासिल
वहीं आयुष्मान भारत के लाभार्थियों की प्रारंभिक सूची में 65 लाख गरीबों के नाम गायब होने पर भूषण ने कहा कि यह योजना एसईसीसी (सोशियो-इकोनॉमिक कास्ट सेंसस) डाटा बेस पर आधारित गरीब और कमज़ोर आबादी के होंगे। इसमें साल 2011 की जनगणना को आधार बनाया गया है। उन्होंने कहा कि राजीरोटी की तलाश में तमाम लोग दूसरे राज्यों में माइग्रेट हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि 50 करोड़ लोगों या 10 करोड़ परिवारों को पांच लाख रुपए का सालाना स्वास्थ्य बीमा देने का लक्ष्य है। हम 95 फीसदी का लक्ष्य हासिल कर चुके हैं, योजना में 5 फीसदी लोगों के नाम न शामिल होना गंभीर विषय नहीं है।