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योग भगाए रोग: कोरोना के दौरान योगासनों की ये दस यौगिक क्रियाएं मजबूत करेंगी आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता

Thu, 08 Apr 2021 03:18 PM IST
Harendra Chaudhary आशीष तिवारी, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • अखिल भारतीय योग महासंघ ने जारी की योगासनों की गाइडलाइन
  • ये प्राणायाम और यौगिक क्रियाएं आपको बचाएंगी कोरोना संक्रमण से
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.योगा - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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कोरोना की दूसरी लहर की दस्तक से एक बार फिर पूरे देश में दहशत है। यही वजह है कि एक बार फिर से ज्यादातर लोग आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के माध्यम से खुद को इस संक्रमण से बचाने के प्रयास करने लगे हैं। इसमें यौगिक क्रियाओं से लेकर काढ़े के इस्तेमाल करने वालों की संख्या बढ़ने लगी है। लेकिन अमूमन देखा जाता है कि लोगों को यौगिक क्रियाओं और आयुर्वेद की दवाओं की बहुत जानकारी नहीं है। अखिल भारतीय योग शिक्षक महासंघ के योगगुरु मंगेश त्रिवेदी बता रहे हैं कि कौन सा प्राणायाम कोरोना में फायदेमंद है और उसको कैसे करना है।

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ये दस यौगिक क्रियाएं दूर करेंगी रोग

योगासनो में, सूक्ष्म व्यायाम, सन्धि संचालन, सूर्य नमस्कार, ताड़ासन, भुजंगासन, धनुरासन, कटिचक्रासन, पवनमुक्तासन, कटिचक्रासन, शशांक आसन आदि बहुत लाभदायक हैं। कोरोना में अपनी रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए योगनिद्रा का अभ्यास भी बहुत लाभदायक है। साथ ही ज्ञान मुद्रा, जल मुद्रा एवं प्राण मुद्रा का अभ्यास आपकी मानसिक शांति के साथ शरीर में जल तत्व की कमी और ऊर्जा को बढ़ाने के लिए बहुत लाभदायक सिद्ध होगा।

ऐसे करना है प्राणायाम

  • कपालभाति प्राणायाम करना है लेकिन सिर्फ 60-60 राउंड के 5 सेट। इससे ज्यादा गर्मी के मौसम में नहीं करना है।
  • अनुलोम विलोम प्राणायाम 5 से लेकर 15 मिनट तक कर सकते हैं।
  • शीतली प्राणायाम 11 से लेकर के 21 बार कर सकते हैं।
  • चंद्रभेदी प्राणायाम 11 से लेकर 21 बार कर सकते हैं।
  • भस्त्रिका प्राणायाम गर्मी के मौसम में बिल्कुल नहीं करना है।
  • उच्च रक्तचाप (हाई बीपी) वालों को भी भस्त्रिका प्राणायाम नहीं करना है।
  • कोई भी सांस रोकने वाला प्राणायाम (कुम्भक) हाई बीपी वालों को नहीं करना है।
  • भ्रामरी प्राणायाम एवं ॐ का उच्चारण 11 से 21 बार नियमित रूप से करना है।

सिर्फ एक बार काढ़ा लेंगे तो भी कारगर होगा

  • ध्यान रखना है कि आयुष काढ़े का इस्तेमाल दिन में सिर्फ एक बार करना है और सिर्फ एक कप पीना है। इससे ज्यादा नहीं पीना है। आयुष काढ़े के अतिरिक्त आप हल्के गर्म पानी के साथ 1 से 3 ग्राम मुलेठी या अश्वगंधा ले सकते हैं।
  • इसके अतिरिक्त तुलसी और गिलोय के स्वरस का भी सेवन करके आप अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा सकते हैं।
  • बहुत ही आवश्यक है कि नाक में सरसों का तेल, गाय का घी या बादाम का तेल जरूर डालें।
  • खाने में मौसमी सब्ज़ियां और हल्का भोजन ही लें। भूखा बिलकुल नही रहना है। रेफ़्रीजरेटर का पानी बिलकुल नही पीना है। पानी हल्का गरम या सामान्य तापमान का पीना है।
  • साथ-साथ अपनी दिनचर्या में ध्यान और मैडिटेशन जरूर करें। सुबह-शाम हल्दी दूध जरूर लें ध्यान रखें। अनावश्यक दवाएं आप बिल्कुल भी ना लें, चाहे वह आयुर्वेदिक हो या एलोपैथिक हो उनके सेवन से बचें।
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जरूरत से ज्यादा न करें

  • जब आप सब कुछ संतुलित तरीके से करेंगे तभी आपको लाभ होगा।
  • आवश्यकता से अधिक चाहे आप आसन करें चाहे प्राणायाम करें या आयुर्वेदिक दवाइयों का सेवन करें वह लाभ के स्थान पर हानि पहुंचाएगा।
  • हृदय रोगी, मधुमेह के रोगी अपना विशेष ध्यान रखें।
  • नींद पूरी लें। प्रयास करें कि रात में 12:00 बजे से पहले सो जाएं और सुबह सूर्योदय से पहले उठ जाएं
  • सभी योगाभ्यास आपको अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार करने हैं। जबरदस्ती कोई भी अभ्यास नही करना है।
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