फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आयुर्वेद के नाम पर नहीं चल सकेगी फर्जी दुकानें, अब लेनी होगी सरकार से अनुमति

Tue, 18 Aug 2020 07:26 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • भारतीय चिकित्सा पद्धति (आयुर्वेद, यूनानी और सिद्धा) के सेंटरों को नियमित करेगी सरकार,
  • मानकों पर खरा उतरने के बाद ही मिलेगा सेंटर चलाने का प्रमाण पत्र,
  • पैरामेडिकल स्टाफ भी होंगे डिप्लोमाधारी                
विज्ञापन
DR. PRADEEP KUMAR, Chairman, Examining Body for para medical training for Bharatiya Chikitsa - फोटो : Amar Ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

आयुर्वेद के लगातार बढ़ते चलन के कारण जगह-जगह पर इससे संबंधित उपचार केंद्र खुल गए हैं। छोटी-छोटी जगहों पर लोगों को डीटॉक्सीफाई करने के सेंटर चलने लगे हैं। लेकिन इन्हें चलाने वालों में डॉक्टरों को छोड़कर बाकी स्टाफ के किसी डिग्री-डिप्लोमाधारी होने की अनिवार्य व्यवस्था नहीं है। यही कारण है कि इस क्षेत्र में अप्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मी लोगों को भारतीय चिकित्सा सेवाएं देने में लगे हुए हैं।

विज्ञापन


लेकिन अब दिल्ली में ऐसा नहीं किया जा सकेगा। पंचकर्मा सहित भारतीय चिकित्सा पद्धति (जैसे आयुर्वेद, यूनानी या सिद्धा) से जुड़ी कोई भी सेवा देने के लिए सरकार के प्रमाणित कोर्स में पास लोग ही ये सेवाएं दे सकेंगे। साथ ही इन सेवाओं को देने वाले सेंटरों को भी एक मानक पर खरा उतरने के बाद ही ये सेवाएं देने की मान्यता दी जाएगी। बिना अनुमति के सेंटर चलाने वालों पर दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकेगी।
 
एक्जामिनिंग बॉडी फॉर पैरामेडिकल ट्रेनिंग फॉर भारतीय चिकित्सा, दिल्ली के चेयरमैन डॉक्टर प्रदीप अग्रवाल ने अमर उजाला को बताया कि भारतीय चिकित्सा पद्धति के अंतर्गत अभी तक डॉक्टरों को नियमित करने की संस्था है, लेकिन इसी क्षेत्र में काम करने वाले पैरामेडिकल स्टाफ को रेगुलेट करने के लिए कोई नियम नहीं है। यही कारण है कि आयुर्वेद के अस्पतालों में डॉक्टरों को छोड़ बाकी कर्मी अप्रशिक्षित होते हैं। इससे लोगों को इन सेवाओं से अपेक्षित लाभ नहीं मिलता है। 
विज्ञापन


लेकिन अब इन सभी संस्थाओं को सरकार के स्टैंडर्ड मानक पर खरा उतरने के बाद ही सेंटर चलाने की अनुमति मिलेगी। मानकों पर खरा न उतरने वाले सेंटरों को अपना कामकाज बंद करना पड़ेगा, अन्यथा उनके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई भी की जाएगी।
 
इस क्षेत्र की सबसे बड़ी चुनौती उचित योग्यता के दक्ष भारतीय चिकित्सा कर्मियों का न होना है। यही कारण है कि एक्जामिनिंग बॉडी फॉर पैरामेडिकल ट्रेनिंग फॉर भारतीय चिकित्सा ने छह विशेष कोर्स तैयार किए हैं। इन कोर्स को किए हुए दक्ष भारतीय चिकित्साकर्मियों को ही भारतीय चिकित्सा सेवाओं के क्षेत्र में काम करने की अनुमति दी जाएगी।

इनमें आयुर्वेद में फार्मेसी, नर्सिंग और पंचकर्म डिप्लोमा, और यूनानी चिकित्सा पद्धति के लिए फार्मेसी, नर्सिंग और रेजिमेंटल थेरेपी में डिप्लोमा। इनमें छह महीने से लेकर दो साल तक के कोर्स शामिल हैं। 

संस्थान अभ्यर्थियों को यह कोर्स कराने के लिए उचित मानकों का पालन करने वाली संस्थाओं को अनुमति देगा। इसके आलावा कोर्स पूरा होने पर छात्रों की परीक्षा लेकर उन्हें प्रमाण पत्र भी जारी करेगा। इस प्रमाण पत्र को प्राप्त किए हुए लोगों को ही भारतीय चिकित्सा सेवाओं में करने की अनुमति होगी।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें