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अयोध्या पर फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने तोड़ी प्रथा, निर्णय लिखने वाले जज के नाम का जिक्र नहीं

Sun, 10 Nov 2019 05:26 AM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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करीब पांच सदी पुराने विवाद और 134 साल चली कानूनी लड़ाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को अयोध्या भूमि विवाद का फैसला सुना दिया। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने एकमत से अयोध्या को भगवान राम का जन्मस्थान मानते हुए पूरी 2.77 एकड़ विवादित जमीन रामलला विराजमान को सौंपकर मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त कर दिया। 

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सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने 1045 पन्नों में अपना फैसला सुनाया। सामान्यत: किसी भी निर्णय में फैसला लिखने वाले जज के नाम का उल्लेख किया जाता है, लेकिन इस बार कोर्ट ने यह परंपरा तोड़ते हुए निर्णय लिखने वाले जज के नाम का जिक्र नहीं किया है। पीठ में सीजेआई गोगोई के अलावा जस्टिस बोबडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नजीर शामिल थे।

वहीं, इस निर्णय में 929 पन्नों के बाद 116 पन्ने परिशिष्ट में जोड़े गए हैं, जिनमें विवादित स्थल और श्री राम के जन्मस्थल होने से संबंधित जानकारियां और तर्क दिए गए हैं। इस परिशिष्ट के लेखक का नाम भी उल्लेखित नहीं किया गया है। 

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