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अयोध्या मामला : इन दलीलों के आधार पर राम मंदिर बनने का रास्ता हुआ साफ

Sat, 09 Nov 2019 02:40 PM IST
अमित कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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अयोध्या का फैसला - फोटो : Amar Ujala
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दशकों पुराने अयोध्या विवाद मामले में देश की सर्वोच्च अदालत ने 9 नवंबर को ऐतिहासिक फैसला सुनाया। अदालत ने 1045 पन्नों के अपने फैसले में रामलला को राम जन्मभूमि सौंपी और मंदिर बनाने का रास्ता साफ कर दिया। इसी के साथ अयोध्या में ही मस्जिद बनाने का इंतजाम भी कर दिया। अगस्त 2019 को अदालत ने इस मुद्दे की दैनिक सुनवाई सुनिश्चित की और 16 अक्तूबर तक 40 दिन की मैराथन सुनवाई के बाद अपना अंतिम फैसला नवंबर में सुनाने की तारीख दी थी। इस दौरान शीर्ष कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनी। सुप्रीम कोर्ट के लंबे फैसले में कुछ ऐसे तर्क रहे, जिनके आधार पर अयोध्या में विवादित जमीन पर राम मंदिर बनने का रास्ता साफ हुआ। 
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खाली जमीन पर नहीं बनी थी मस्जिद 

  • हम एएसआई की खुदाई में मिले सबूतों की अनदेखी नहीं कर सकते
  • बाबरी मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनी थी 
  • मस्जिद के नीचे विशाल संरचना थी, जो कलाकृतियां मिली हैं, वह इस्लामिक नहीं थीं। 

बाहरी चबूतरे पर हिंदू करते थे पूजा 

  • हिंदू बाहरी परिसर में पूजा किया करते थे और मुस्लिम अंदर नमाज पढ़ते थे
  • हालांकि गर्भगृह पर भी हिंदू अपना दावा करते थे
  • मुस्लिम पक्ष यह दावा नहीं कर पाए कि 1857 से पहले मुस्लिम यहां नमाज पढ़ा करते थे

अंग्रेजों के काल में भी पूजा 

  • अंग्रेजों के शासनकाल में राम चबूतरा और सीता रसोई में पूजा हुआ करती थी
  • इस बात के सबूत हैं कि हिंदुओं के पास विवादित जमीन के बाहरी हिस्से का कब्जा था

व्यक्तिगत आस्था का सवाल 

  • हिंदू इसे भगवान राम की जन्मभूमि मानते हैं। उनकी अपनी धार्मिक भावनाएं हैं। 
  • हिंदुओं का मानना है कि भगवान राम केंद्रीय गुंबद के नीचे जन्मे थे। यह व्यक्तिगत आस्था की बात है।
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