हम रामजन्म स्थान नहीं बदल सकते
अयोध्या में 55-60 मस्जिदें हैं, जहां मुस्लिम नमाज अदा कर सकते हैं, लेकिन हिंदू भगवान राम का जन्मस्थान नहीं बदल सकते। इस पर सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील राजीव धवन ने कहा कि क्या परासरन बताएंगे कि अयोध्या में कितने मंदिर हैं? परासरन ने कहा, बड़ी संख्या में मंदिर होना जन्मस्थान की महत्ता दर्शाता है। जनसंख्या का अनुपात भी देखना चाहिए। वहीं, कोर्ट ने महंत सुरेश दास की ओर से पैरवी कर रहे परासरन से सीमा के सम्मान के कानून, प्रतिकूल कब्जे के सिद्धांत सहित तमाम विधिक मसलों पर सवाल उठाते हुए पूछा कि 2.77 एकड़ विवादित जमीन से मुस्लिमों का कब्जा कैसे हटाया जाए?
आज की सुनवाई की समयसीमा तय
सीजेआई ने बुधवार की सुनवाई के लिए समयसीमा बांधते हुए कहा, हिंदू पक्षकार की ओर से सीएस वैद्यनाथन 45 मिनट दलीलें देंगे। उसके बाद एक घंटे सुन्नी वक्फ बोर्ड को मौका मिलेगा। इसके बाद दोनों पक्षों को 45-45 मिनट मिलेगा। दोनों पक्ष तय कर लें कि कौन कितना समय लेगा। इसके बाद मोल्डिंग ऑफ रिलीफ पर दोनों बात रखेंगे। यानी, दोनों पक्षों ने अब तक जो गुहार लगाई है क्या उससे आगे-पीछे कुछ गुंजाइश बन सकती है?
कोर्ट रूम लाइव : एक बार मंदिर बन गया तो मंदिर रहेगा
सुप्रीम कोर्ट : क्या आप मुस्लिम पक्ष की इस दलील से सहमत हैं कि एक बार मस्जिद बन गई तो हमेशा मस्जिद ही रहेगी?
परासरन : मैं सहमत नहीं। हमारा कहना है कि एक बार मंदिर बन गया तो हमेशा मंदिर रहता है। मैं मुस्लिम पक्ष की दलीलों पर टिप्पणी नहीं करना चाहता क्योंकि मैं विशेषज्ञ नहीं।
सीजेआई धवन से : क्या आपको लगता है हमने दूसरे पक्ष से पर्याप्त सवाल पूछे। कल आप कह रहे थे कि सवाल सिर्फ मुस्लिम पक्ष से पूछे जाते हैं।
धवन : मेरे कहने का वह मतलब नहीं था।