फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हरियाणा विधानसभा चुनाव: भाजपा के लिए जाटलैंड का चक्रव्यूह भेदना बड़ी चुनौती

Wed, 16 Oct 2019 12:17 AM IST
Nilesh Kumar हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली

सार

  • जाटलैंड की करीब 30 सीटों पर बड़े दिग्गजों को भी कड़ी चुनौती
  • उत्तर, दक्षिण हरियाणा की तुलना में यहां मिल रही कड़ी टक्कर
  • किसी सीट पर जेजेपी से तो किसी पर कांग्रेस के साथ सीधा मुकाबला 
विज्ञापन
Manohar lal Khattar, Selja kumari, Bhupinder singh hooda, - फोटो : Social Media
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हरियाणा विधानसभा चुनाव में जाटलैंड की सीटों पर विपक्षी चक्रव्यूह को भेदना भाजपा के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। उत्तर और दक्षिण हरियाणा की तुलना में जाटलैंड की करीब 30 सीटों पर पार्टी के बड़े दिग्गजों को भी कड़ी चुनौती मिल रही है। पार्टी पिछले विधानसभा और हाल के लोकसभा चुनाव में भी जाटलैंड से जुड़ी सीटों पर विपक्ष का सियासी तिलिस्म नहीं तोड़ पाई थी।

विज्ञापन


पिछले चुनाव में जाटलैंड की 30 में से 10 सीट जीतने वाली भाजपा को इस बार भी कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। जाट बिरादरी के दो कद्दावर मंत्री, प्रदेश अध्यक्ष से जुड़ी नारनौंद, बादली और टोहाना के अलावा गढ़ी सांपला, किलोई, बेरी, महम जैसी कई सीटों पर पार्टी उम्मीदवार आमने-सामने के मुकाबले में फंसे हैं। 

यहां किसी सीट पर जेजेपी से तो किसी पर कांग्रेस के साथ सीधा मुकाबला है। गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव में विपक्ष का सूपड़ा साफ करने के बावजूद इनमें से कई विधानसभा सीटों पर भाजपा बढ़त बनाने में नाकाम रही थी।
विज्ञापन


पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी को उत्तर हरियाणा की 31 में से 22, दक्षिण हरियाणा की 29 में से 16 सीटों पर जीत मिली थी। खासतौर पर उत्तर हरियाणा में मिली बड़ी सफलता के कारण पार्टी राज्य में पहली बार बहुमत का आंकड़ा पार करने में सफल रही थी। इस बार जाटलैंड की पुंडरी, गुहला, चरखी दादरी और महम सीट पर भाजपा उम्मीदवार को बागियों का भी सामना करना पड़ रहा है।

विज्ञापन

राष्ट्रवाद के मुद्दे, पीएम मोदी से उम्मीदें

PM Narendra Modi - फोटो : ANI
पार्टी के रणनीतिकार मानते हैं कि पार्टी को जाटलैंड में चुनौती का सामना करना पड़ा रहा है। हालांकि उनका यह भी दावा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों और अनुच्छेद 370 को खत्म करने जैसे मुद्दे के आगे आने के बाद स्थिति में बदलाव आ रहा है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें