अयोध्या भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के आए ऐतिहासिक फैसले के बाद बाबरनामा की चर्चा होने लगी है। बाबरनामा में राम मंदिर के बारे में कुछ नहीं लिखा गया है।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान भी एक संस्था ने यह दावा किया था कि मुगल बादशाह बाबर न तो अयोध्या गया था और और न ही विवादित राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद स्थल पर 1528 में मस्जिद बनाने के लिए मंदिर को ध्वस्त करने का आदेश दिया था।
एक मुस्लिम पार्टी द्वारा दायर मुकदमे में प्रतिवादी अखिल भारतीय श्री राम जन्म भूमि पुनरुद्धार समिति ने प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान बाबरनामा, हुमायूंनामा, अकबरनामा और तुजुक-ए-जहांगीरी जैसी ऐतिहासिक पुस्तकों का उल्लेख किया था। संस्था ने कहा था कि इनमें से किसी में भी बाबरी मस्जिद के अस्तित्व का जिक्र नहीं किया गया है।
बाबरनामा में प्रथम मुगल बादशाह के सेनापति मीर बाकी द्वारा अयोध्या में बाबरी मस्जिद का निर्माण या मंदिर गिराए जाने का कोई जिक्र नहीं है। बाबरनामा बादशाह के जीवन के 18 वर्षों से संबंधित है, लेकिन उसमें अयोध्या में किसी मस्जिद के बारे में जिक्र नहीं करता। इसके अलावा जब मस्जिद का निर्माण करने का आदेश दिया गया था, उस समय बादशाह राजा आगरा में था।