आईएसएस पर एक्सिओम 4 के एस्ट्रोनॉट
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भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला और उनके साथी एक्सिओम-4 मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर रहते हुए अब तक 230 बार सूर्योदय देखे हैं और लगभग 100 लाख किलोमीटर की दूरी तय कर ली है। एक्सिओम-4 दल में शुभांशु शुक्ला, पेगी व्हिटसन, स्लावोश उजनांस्की-विस्निवस्की, और टिबोर कापू शामिल हैं। इन सभी ने पृथ्वी की 230 बार परिक्रमा कर ली है और करीब 96.5 लाख किलोमीटर (6 मिलियन मील) की दूरी तय की है। इस मिशन का संचालन अमेरिका की निजी अंतरिक्ष कंपनी एक्सिओम स्पेस कर रही है।
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अंतरिक्ष में शांति और विज्ञान का संगम
एक्सिओम स्पेश ने एक बयान में बताया कि अंतरिक्ष यात्री लगभग 250 मील (करीब 400 किलोमीटर) ऊंचाई से पृथ्वी की सुंदर तस्वीरें और वीडियो ले रहे हैं। अपने व्यस्त वैज्ञानिक कार्यक्रमों से फुरसत के कुछ पलों में वे अपने परिवारों से जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
सबसे ज्यादा प्रयोग वाला निजी मिशन
एक्सिओम-4 मिशन ने अब तक के निजी अंतरिक्ष मिशनों में सबसे अधिक वैज्ञानिक प्रयोग किए हैं- कुल 60 से अधिक प्रयोग, जो कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों से जुड़े हैं। इसमें जैव चिकित्सा, नई किस्म की सामग्रियां, मस्तिष्क विज्ञान, कृषि, स्पेस टेक्नोलॉजी शामिल है। इन प्रयोगों का मकसद न केवल अंतरिक्ष यात्रा को आसान बनाना है, बल्कि पृथ्वी पर जीवन को बेहतर बनाना भी है। डायबिटीज के इलाज, कैंसर के नए उपचार, और मानव स्वास्थ्य निगरानी जैसे कई क्षेत्रों में बड़ी सफलता की संभावना जताई जा रही है।
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पृथ्वी पर वापसी की तैयारी
दो हफ्ते का समय पूरा करने के बाद, अब एक्सिओम-4 का दल अपनी आखिरी छुट्टी मना चुका है और नासा की वापसी की घोषणा का इंतजार कर रहा है।अंतरिक्ष यान ड्रैगन ने 25 जून को फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटरसे उड़ान भरी थी और 28 घंटे की यात्रा के बाद आईएसएस से जुड़ गया था।
एक्सिओम स्पेस का मानना है कि इस मिशन के जरिए वे एक ऐसे भविष्य की ओर कदम बढ़ा रहे हैं जहां दुनिया भर के लोग कम-ऊंचाई वाली कक्षा में रहकर काम कर सकें। कंपनी के बयान में कहा गया 'हर टेस्ट ट्यूब, हर डेटा प्वाइंट और हर अवलोकन हमें उस भविष्य के करीब लाता है जब इंसान न सिर्फ पृथ्वी पर, बल्कि अंतरिक्ष में भी घर बसाएंगे।'