मणिपुर में सरकारी बस पर राज्य का नाम छिपाने को लेकर हुए विवाद के बाद भाजपा नेता और पूर्वोत्तर क्षेत्र के प्रभारी संबित पात्रा ने कहा कि यह मामला 'समझने की गलती' थी। वहीं इस मामले में मीडिया संगठनों ने राज्यपाल को एक ज्ञापन भी भेजा है।
मणिपुर में सुरक्षा बलों की तरफ से बस पर राज्य का नाम छिपाने के मामले में मचे बवाल पर भाजपा की तरफ से सफाई दी गई है। भाजपा के पूर्वोत्तर क्षेत्र के प्रभारी संबित पात्रा ने कहा कि मणिपुर में सुरक्षा बलों की तरफ से एक सरकारी बस पर राज्य का नाम छिपाने का मामला 'समझने की गलती' थी। उन्होंने यह भी कहा कि मणिपुर की अखंडता अविचल है और इसे लेकर कोई समझौता नहीं होगा।
क्या है पूरा मामला?
यह घटना इंफाल पूर्वी जिले के ग्वालताबी में हुई, जहां पत्रकारों को 'शिरुई लिली' उत्सव कवरेज के लिए भेजा गया था। सुरक्षा बलों ने बस को रोका और बस के कांच पर लिखे मणिपुर राज्य परिवहन के नाम को एक सफेद कागज से ढकने का आदेश दिया। इस मामले में संबित पात्रा ने एक वीडियो संदेश में कहा, 'मैं मणिपुर राज्य को शिरुई लिली उत्सव आयोजित करने के लिए बधाई देता हूं। यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना एक समझने की गलती थी। मैं यह स्पष्ट रूप से कहता हूं कि मणिपुर की अखंडता के बारे में गृह मंत्री अमित शाह ने हमेशा कहा है कि यह कोई समझौता नहीं होगा।' उन्होंने कहा कि मणिपुर में दो साल बाद उत्सव का आयोजन हुआ है, जो खुशी की बात है और इसे साजिश नहीं माना जाना चाहिए।
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पूर्व सीएम बीरेन सिंह ने पूछा सवाल
इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए, पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने कहा कि जो भी इस अविचारपूर्ण कार्रवाई के लिए जिम्मेदार हैं, उन्हें दंडित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, मणिपुर का नाम छिपाना क्या सही है? इस प्रकार की कार्रवाई करने वालों को सजा मिलनी चाहिए।'
मीडिया संगठनों ने भी घटना पर जताया विरोध
मणिपुर की मीडिया संगठनों ने भी इस घटना के खिलाफ विरोध जताया और पत्रकारों को हुई परेशानी को लेकर बुधवार को 'पेन डाउन स्ट्राइक' और राज्य सरकार से संबंधित समाचारों का बहिष्कार करने का ऐलान किया। उन्होंने राज्यपाल को एक ज्ञापन भी भेजा, जिसमें घटना में शामिल सुरक्षा बलों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की मांग की गई।