अविरल गंगा के आंदोलन की नई जमीन काशी में तैयार होगी। इसके लिए गंगा बचाओ अभियान के तहत जन चेतना पैदा करने की कोशिश की जाएगी। यह जानकारी अभियान के संयोजक निलय उपाध्याय ने गुरुवार को दी। कहा कि भारतीय संस्कृति की प्रतीक गंगा की अविरलता, निर्मलता के लिए अब ठोस उपाय नहीं किए गए तो देर हो जाएगी। आने वाले दिनों में गंगा को बचाना मुश्किल हो जाएगा।
लंका स्थित अभियान के कार्यालय में निलय ने गुरुवार की दोपहर अमर उजाला से बातचीत में गोमुख से पश्चिम बंगाल तक गंगा के संकट को रेखांकित किया। बताया कि हाल में ही अभियान के तहत कोलकाता से गंगोत्री तक लेखकों की यात्रा निकाली गई थी। इस दौरान गंगा को कमजोर करने वाले कारणों की पड़ताल की गई।
इसके बाद हरिद्वार में हुई बैठक में राष्ट्रीय नदी के रूप में गंगा को मान्यता दिलाने, गंदगी फैलाने से रोकने, गंगा को बांधमुक्त बनाने और प्राकृतिक जल प्रवाह जैसे मुद्दों को उठाया गया। बताया कि फिलहाल गंगा पर वैचारिक आंदोलन की जमीन तैयार करने के लिए लेखकों, संस्कृति कर्मियों, फिल्मकारों और विचारकों का समूह एकजुट होगा। इसका केंद्र काशी होगा।