संगठन ने 'चेक बिफोर यू टेक' अभियान शुरू करने का सुझाव दिया है। इसके तहत पायलटों को कोई नई दवा लेने से पहले उसके घटकों की जांच करने के लिए जागरूक किया जाएगा। खासतौर पर यह देखना होगा कि दवा में अल्कोहल या कोई प्रतिबंधित पदार्थ तो नहीं है।
फुकेट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की उड़ान में तेज टर्बुलेंस के कारण विमान करीब 300 फीट नीचे आ गया था। घटना में 17 लोग घायल हुए थे। जांच के दौरान विमान के मुख्य पायलट का दूसरा और पुष्टिकरण डोप टेस्ट गांजा सेवन के लिए पॉजिटिव पाया गया। अब इस मामले के बाद मंगलवार को फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स ने विमानन सुरक्षा को मजबूत करने के लिए डीजीसीए को कई सुझाव भेजे है।
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फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स का कहना है, मौजूदा नियमों के तहत विमानन कर्मचारियों में कम से कम 10 प्रतिशत का रैंडम ड्रग टेस्ट किया जाता है। संगठन इसे बढ़ाकर 20 से 25 प्रतिशत करने का सुझाव दिया है। संगठन के मुताबिक, एक पायलट का साल में एक से ज्यादा बार भी रैंडम टेस्ट किया जा सके। वहीं इस जांच को पूरे साल बिना किसी पूर्व सूचना के और पूरी तरह रैंडम तरीके से कराने की सिफारिश की है। इससे पायलटों को पहले से टेस्ट की जानकारी नहीं होगी और जांच की निष्पक्षता भी बनी रहेगी।
संगठन ने यूरिन टेस्ट के साथ ओरल फ्लूड यानी लार से ड्रग टेस्ट शुरू करने का सुझाव दिया है। संगठन का कहना है कि इससे मौजूदा यूरिन टेस्ट खत्म नहीं होगा। लार की जांच को एक अतिरिक्त विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। क्योंकि लार का सैंपल लेना आसान और तेज होता है। एयरपोर्ट या कार्यस्थल पर ही इसकी जांच की जा सकती है। इससे क्रू का समय बचेगा और फ्लाइट में देरी भी कम होगी। लार की जांच हाल में हुए ड्रग एक्सपोजर का पता लगाने में भी मददगार हो सकती है।
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एफआईपी ने कहा है कि सिर्फ शुरुआती स्क्रीनिंग में पॉजिटिव आने पर किसी पायलट को दोषी नहीं माना जाना चाहिए। इसके लिए चरणबद्ध जांच प्रक्रिया अपनाने का सुझाव संगठन ने दिया है। इसमें पहले स्क्रीनिंग, फिर लैब से पुष्टि, मेडिकल जांच और उसके बाद अंतिम निर्णय शामिल हो। इससे किसी दवा के इस्तेमाल और वास्तव में ड्रग सेवन के बीच अंतर साफ करने में मदद मिलेगी।
संगठन ने 'चेक बिफोर यू टेक' अभियान शुरू करने का सुझाव दिया है। इसके तहत पायलटों को कोई नई दवा लेने से पहले उसके घटकों की जांच करने के लिए जागरूक किया जाएगा। खासतौर पर यह देखना होगा कि दवा में अल्कोहल या कोई प्रतिबंधित पदार्थ तो नहीं है। संगठन ने ऐसी दवाओं को लेकर भी सावधानी बरतने को कहा है, जो उनींदापन या उड़ान क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं। इसमें कफ सिरप, एंटी-एलर्जी, नींद और एंग्जायटी की दवाएं, दर्द निवारक और कुछ हर्बल उत्पाद शामिल हैं।