रांची की स्पेशल एनआईए कोर्ट ने 'तृतीय प्रस्तुति कमिटी' (टीपीसी) के लिए फंड जुटाने के मकसद से झारखंड के आम्रपाली-मगध कोयला खनन इलाकों में कोयला ट्रांसपोर्टरों, ठेकेदारों और व्यापारियों से जबरन वसूली से जुड़े मामले में 12 आरोपियों को पांच से दस साल कैद की सजा सुनाई है। एनआईए केस (RC-06/2018/NIA/DLI) में सज़ा पाने वाले बारह आरोपियों में से पांच को अधिक से अधिक 10 साल की कठोर कैद, छह को अधिक से अधिक 8 साल की कठोर कैद और एक को अधिक से अधिक 5 साल की कठोर कैद की सजा सुनाई गई।
13 आरोपियों के खिलाफ शुरुआती ट्रायल
यह मामला झारखंड के चतरा जिले के टंडवा पुलिस स्टेशन के इलाके में आने वाले आम्रपाली और मगध कोयला खनन क्षेत्रों में जबरन वसूली और लेवी वसूलने से जुड़ा है। एनआईए ने कुल 21 (16+5) आरोपियों के खिलाफ क्रमशः 22 दिसंबर 2018 और 10 जनवरी 2020 को चार्जशीट और सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की थी। चार्जशीट में नामजद 13 आरोपियों के खिलाफ शुरुआती ट्रायल, अभियोजन पक्ष के 119 गवाहों के बयान दर्ज होने के साथ पूरा हुआ। 12 अगस्त 2026 को, रांची की स्पेशल एनआईए कोर्ट ने चार्जशीट में नामजद 12 आरोपियों को IPC और UA (P) एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी पाया, जबकि एक आरोपी को बरी कर दिया गया।
ट्रांसपोर्टेशन की इजाज़त देने के बदले वसूली
एनआईए की जांच से पता चला है कि प्रतिबंधित 'तृतीय प्रस्तुति कमिटी' (टीपीसी) के सदस्य, हथियारबंद कैडर सीपीआई (माओवादी) से भी जुड़े थे। वे स्थानीय कमेटियों, व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों और अधिकारियों की मिलीभगत से एक आपराधिक साजिश का हिस्सा थे। इस साज़िश का मकसद कोयला खदानों से कोयले की माइनिंग और ट्रांसपोर्टेशन की इजाजत देने के बदले लेवी (वसूली) इकट्ठा करना था।