बंगलूरू के आईटी इंजीनियर अतुल सुभाष की आत्महत्या का मामला इन दिनों देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। उन्होंने आत्महत्या से पहले एक 24 पन्नों की चिट्ठी लिखी, जिसमें अपनी पत्नी निकिता के साथ साथ ससुराल वालों पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने अपने चार साल के बेटे कि लिए भी चिट्ठी लिखी। अतुल ने इस चिट्ठी में बताया कि वह अपने बेटे से मिलने के लिए तरसते थे, क्योंकि उनकी पत्नी उन्हें बेटे से मिलने नहीं देती थी। उन्होंने अपने बेटे को कई सुझाव और सलाह भी दिए। इसके साथ ही उन्होंने अपने बेटे को बताया कि उनकी पत्नी उसका इस्तेमाल कर उन्हें परेशान कर रही थी। अतुल ने कहा कि वह अपने बेटे के कारण अपने माता-पिता को परेशान नहीं देख सकते हैं। वह अपने पिता के लिए उसके जैसे 100 बेटों को कुर्बान कर सकते हैं।
चार साल के बेटे को लिखी चिट्ठी
चिट्ठी में अतुल ने कहा, बेटा, "मैंने जब तुम्हें पहली बार देखा, तब मैंने सोचा था कि मैं तुम्हारे लिए अपनी जान भी दे सकता हूं। लेकिन, दुख की बात है कि मैं तुम्हारे कारण अपनी जान दे रहा हूं। मुझे तो अब तुम्हारा चेहरा भी याद नहीं है, जब तक की न मैं वह तस्वीर देख लूं, जिसमें तुम एक साल के थे। मुझे तो सिर्फ दर्द के अलावा तुम्हारे बारे में कुछ याद नहीं है। तुम्हारा इस्तेमाल कर मुझसे पैसे लूटे जा रहे थे। तुम्हे देखकर अब ऐसा लग रहा है कि मैंने कोई गलती की है।"
अतुल को बेटे से मिलने देने के लिए पत्नी ने की थी तीन लाख की मांग
अतुल ने बताया कि अदालत ने उन्हें पत्नी और बेटे को 80 हजार रुपये प्रति माह गुजारा भत्ता के रूप में देने के लिए कहा था, लेकिन उनकी पत्नी निकिता दो लाख रुपये की मांग कर रही थी। उन्होंने कहा कि इस बेशर्म व्यवस्था ने एक बेटे को उसके पिता के लिए बोझ बना दिया। अतुल के भाई बिकास ने बताया कि चिट्ठी में यह भी लिखा था कि निकिता ने अतुल को बेटे से मिलने के लिए 30 लाख रुपये की मांग की थी।
चिट्ठी में अतुल ने आगे कहा, "जब मैं जिंता हूं और पैसे कमा रहा हूं। ये लोग तुम्हारा इस्तेमाल कर तुम्हारे दादा-दादी, चाचा और मुझे परेशान करते रहेंगे। मैं अपने माता-पिता और भाई को बेवजह परेशान नहीं दोख सकता हूं। मैं अपने पिता के लिए तुम्हारे जैसे 100 बेटों को कुर्बान कर सकता हूं और तुम्हारे लिए अपने जैसे 1000 को कुर्बान कर दूंगा। मैं अपने पिता की परेशानी का कारण नहीं बन सकता।" उन्होंने अपने बेटे से कहा कि वह कभी भी यह नहीं समझ सकता कि एक पिता कैसा होता है। चिट्ठी में उन्होंने आगे लिखा, मुझे मालूम है कि एक पिता कैसा होता है। उन्हें पाना सौभाग्य की बात है। वह मेरा गौरव है। इसे समझाया नहीं जा सकता है। काश मैं तुम्हारे साथ होता।
बेटे को कार से कॉलेज ले जाने के लिए पैसे बचा रहे थे अतुल
तलाक की कार्यवाही के दौरान अपने अनुभव को साझा करते हुए अतुल ने चिट्ठी में कहा, "मैं सोचता था कि महिला सशक्तिकरण शायद अधिकांश शिक्षित पुरुषों की तरह अच्छा है, लेकिन ऐसा नहीं है। यह बहुत ही खराब है और इसे समाप्त होना चाहिए।" उन्होंने आगे कहा, "मुझे अभी भी हंसी आती है कि तुम्हें कार से कॉलेज ले जाने के लिए मैंने पैसे बचाना शुरू कर दिया था।"
तलाक की कार्यवाही के दौरान अपने अनुभव को साझा करते हुए अतुल ने चिट्ठी में कहा, मैं सोचता था कि महिला सशक्तिकरण शायद अधिकांश शिक्षित पुरुषों की तरह अच्छा है, लेकिन ऐसा नहीं है। यह बहुत ही खराब है और इसे समाप्त होना चाहिए। उन्होंने आगे कहा, "मुझे अभी भी हंसी आती है कि तुम्हें कार से कॉलेज ले जाने के लिए मैंने पैसे बचाना शुरू कर दिया था।" उन्होंने आगे कहा, "तुम्हारे ऊपर किसी का भी कोई बकाया नहीं है। इस समाज पर भरोसा मत करना। इसके व्यवस्था पर भरोसा मत करना। समाज और व्यवस्था दोनों ही केवल अपना पेट भरना चाहते हैं। अगर मेरा खून तुम्हारे अंदर है तो तुण जिंदा रहोगे और इससे लड़ोगे। अपने दिमाग से पूरी समस्या का समाधान निकालोगे।"
पत्नी ने लगाए थे गंभीर आरोप
बता दें कि निकिता सिंघानिया ने न्यायालय के समक्ष अपने पति अतुल सुभाष पर गंभीर आरोप लगाए थे। कहा था कि उसके संबंध एक दूसरी महिला से है। साक्ष्य के रूप में कुछ प्रस्तुत भी किया है। अतुल निकिता को भी गुजारा भत्ता देता था। भरण-पोषण का आदेश 29 जुलाई 2024 को हुआ था। करीब साढ़े चार महीने तक अतुल ने आदेश से असहमति नहीं जताई।
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