जब से यह समाचार आया था कि ओसीसीआरपी भारत की कुछ कंपनियों में निवेश को लेकर एक नई रिपोर्ट जारी कर सकती है, तभी से यह अनुमान लगाने की कोशिश की जा रही थी कि इसके जाल में कौन फंसेगा? इसके निशाने पर कौन होगा और क्या इसका 2024 के लोकसभा चुनावों पर भी असर होगा? हिडनबर्ग रिपोर्ट 1.0 के जरिए केंद्र सरकार पर निशाना साधने की कोशिश की गई थी। अब जब हिंडनबर्ग रिपोर्ट 2.0 यानी ओसीसीआरपी की रिपोर्ट सामने आ गई है, यह स्पष्ट हो गया है कि इसके निशाने पर एक बार फिर गौतम अदाणी हैं।
ओसीसीआरपी की रिपोर्ट में फर्जी तरीके से शेल कंपनियों के जरिए पैसे को एक स्थान से दूसरे स्थान पर घुमाते हुए अंत में अदाणी ग्रुप में लगाकर इसके शेयरों की कीमतों में नकली उछाल लगाने के आरोप लगाए गए हैं। रिपोर्ट के सामने आते ही अदाणी ग्रुप ने एक बयान जारी कर यह साफ कर दिया कि इसमें कुछ भी नया नहीं है। इसके पहले हिंडनबर्ग रिपोर्ट में भी यही बातें कही गई थीं। ग्रुप ने साफ कर दिया कि इस मामले में जांच हुई थी और सर्वोच्च न्यायालय ने इसमें उसे सही पाया है। रिपोर्ट के सामने आने के बाद ही अदाणी ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में एक बार फिर तेज गिरावट दर्ज की गई और कई कंपनियों के शेयरों में निवेशकों को काफी नुकसान हुआ है।
राहुल ने मोदी को घेरा
इसके साथ ही राहुल गांधी ने 'गार्जियन' और 'द फाइनेंशियल टाइम्स' में प्रकाशित इस रिपोर्ट के सहारे केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि यह भारत की प्रतिष्ठा की बात है। यह स्पष्ट होना चाहिए कि समाचार में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। रिपोर्ट में गौतम अदाणी के भाई विनोद अदाणी और उनके दो मित्रों के जरिए अदाणी ग्रुप के शेयरों की खरीद कर इसमें नकली उछाल पैदा करने के आरोप लगाए गए हैं।
ऑर्गनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट्स (OCCRP) की रिपोर्ट के सहारे राहुल गांधी ने प्रश्न किया कि यह भारत की प्रतिष्ठा की बात है। जिस समय देश जी-20 का आयोजन कर रहा है, और 40 देशों के राष्ट्राध्यक्ष देश में मौजूद रहने वाले हैं, इससे भारत में निवेश के लिए बेहतर संभावनाएं बनेंगी, लेकिन हिंडनबर्ग रिपोर्ट 2,0 से लोगों में यह संदेह पैदा होगा कि भारत में कंपनियों के लिए निवेश के लिए उचित माहौल नहीं है। यहां सबके लिए समान अवसर नहीं है और इस कारण देश की छवि प्रभावित होगी। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच होनी चाहिए और सच सामने आना चाहिए।
चूंकि, विपक्ष ने हिंडनबर्ग रिपोर्ट 1.0 के सहारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गौतम अदाणी के संबंधों पर गंभीर प्रश्न उठाकर केंद्र को असहज कर दिया था, माना जा रहा है कि नई रिपोर्ट के सहारे भी विपक्ष केंद्र को घेरने की कोशिश करेगा। इस तरह यह 2024 लोकसभा चुनाव के पहले केंद्र को घेरने की मजबूत कोशिश हो सकती है।
रिपोर्ट की मंशा पर उठ रहे हैं सवाल
हिंडनबर्ग या ओसीसीआरपी रिपोर्ट लाने की मंशा पर पहले दिन से प्रश्न खड़े किए जा रहे हैं। कहा जाता है कि इन रिपोर्ट्स को अमेरिकी उद्योगपति जॉर्ज सोरोस आर्थिक मदद देते हैं। वे कृत्रिम तरीके से किसी कंपनी के शेयरों में गिरावट करते हैं और बाद में उसके शेयरों को खरीद-बेचकर भारी लाभ कमाते हैं। उन्हें भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोधी के तौर पर देखा जाता है। इसलिए चुनाव के ठीक पहले इस तरह की रिपोर्ट को लाने पर भी प्रश्न खड़े किए जा रहे हैं।