सिर्फ हथियारों की बड़ी खेप को देश के अलग-अलग हिस्सों में ठिकाने लगाने वाले बड़े नेटवर्क के तौर पर ही अतीक अहमद की जांच नहीं की जाएगी, बल्कि लश्कर-ए-तैयबा जैसे अनेक आतंकी संगठनों से भी उसके गठजोड़ को अब तलाशा जा रहा है। जांच एजेंसी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अभी तक की मिली जानकारी के मुताबिक अतीक अहमद सिर्फ यूपी का माफिया ही नहीं है, बल्कि उसकी जड़ें सीमा पार बैठे पाकिस्तान के आतंकियों और आईएसआई के बड़े गठजोड़ के साथ प्रदेश और देश को खोखला करने में लगी हुई हैं। केंद्र की जांच एजेंसियों से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि यूपी पुलिस रिमांड में मिलने वाले इनपुट के साथ केंद्रीय जांच एजेंसी अभी इस मामले में आगे की कार्रवाई करेंगी।
अशरफ के संबंध डॉन अबू सलीम से
जांच एजेंसियों से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पिछले साल करनाल में भारी मात्रा में आईडी के साथ कुछ हथियार मिले थे। इस दौरान चार आतंकियों को भी करनाल में इतने बड़े जखीरे के साथ गिरफ्तार भी किया गया था। यह सारा विस्फोटक ड्रोन के माध्यम से पाकिस्तानी आतंकियों ने पंजाब भेजा और उसके बाद प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में ले जाया जा रहा था। उन सभी आतंकियों का कनेक्शन पाकिस्तान में बैठे खालिस्तानी आतंकी हरविंदर सिंह रिंदा से सामने आ गया था। पुलिस रिमांड के मुताबिक अतीक अहमद ने पंजाब में हथियारों के नेटवर्क और उनकी सप्लाई की बात स्वीकार की है। इसलिए यह जानना भी जरूरी होगा कि क्या अतीक अहमद का पाकिस्तानी आतंकी हरविंदर सिंह रिंदा से भी कोई नाता है या नहीं।
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जांच एजेंसियों से जुड़े सूत्रों की मानें तो अतीक अहमद के भाई अशरफ का संबंध डॉन अबू सलीम से भी है। सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अबू सलीम से नजदीकी का फायदा उठाते हुए अतीक अहमद अपने बेटे को महाराष्ट्र में सुरक्षित तौर पर छुपाना चाहता था। सूत्रों का कहना है कि उनको यह पता चला था कि अबू सलेम ने पुणे में असद और गुलाम को छुपाने के लिए बंदोबस्त करने की तैयारी कर ली थी। लेकिन बात करने से पहले ही मामला बिगड़ गया और उसका एनकाउंटर हो गया। जांच एजेंसियों से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अतीक अहमद की रिमांड के दौरान ऐसे ही तमाम सवालों के जवाब मिलने की उन्हें उम्मीद है, ताकि उस बड़ी साजिश को बेनकाब किया जा सके जो अतीक अहमद पाकिस्तान के आतंकियों के साथ मिलकर कर रहा था।