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दोस्ती निभाने में माहिर थे अटल बिहारी वाजपेयी, ब्लैक एंड व्हाइट फोटो बनी गवाह

Thu, 16 Aug 2018 06:12 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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अटल बिहारी वाजपेयी वो नाम है जिसे दोस्ती निभाने के लिए बसूबी जाना जाता है। भले ही वो अभी भारतीय राजनीति में सक्रीय नहीं हैं लेकिन उनकी उपस्थिति सदैव भारतीय राजनीति में मौजूद रहेगी। राजनीति में कुर्सी के लिए बेशक कई साजिशे होती है। लेकिन इसी बीच दोस्ती की कुछ मिसाले भी है। इन मिसालो में अटल जी और भैरोसिंह शेखावत की दोस्ती भी है। इन दोनों दोस्तों ने राजनीति में अलग-अलग मुकाम हासिल किए और देश की राजनीति को अलग मोड़ दिया। एक प्रधानमंत्री बना तो दूसरा उपराष्ट्रपति बना।

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राजनीति में अटल बिहारी बाजपेयी को कौन नहीं जानता। अटल राजनीति में अजातशत्रु के नाम से मशहुर हुए जब सदन में वह बोलते तो लोगों में उन्हें सुनने की इच्छा जागृत होती। संघ से ताल्लुक रखने वाले अटल की दोस्ती थी संघ के ही प्रमुख नेता भैरव सिंह शेखावत से, दोनों ने राजनीति में अलग अलग मुकाम हासिल किए एक प्रधानमंत्री बना तो दूसरा उपराष्ट्रपति बन कर राजनीति को नई दिशा दी।

अटल, आडवाणी और भैरोसिंह की दोस्ती राजस्थान से शुरू हुई। सियासत के साथ इनकी आपसी समझ बढ़ती गई और भावनाओं के तार जुड़ने लगे। 1882 में भैरों सिंह की बेटी की शादी में लोगों ने इस दोस्ती की हकीकत को जाना। अटल जी भैरोसिंह की बेटी की शादी में कन्यादान करने पहुंचे थे। जैसे ही अटल जी इस शादी में पहुंचे तो दोनों नेता ऐसे गले मिले जैसे अरसो बाद दो दोस्तों का मिलन हुआ हो।

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अटल बिहारी वाजपेयी और भैरव सिंह शेखावत की दोस्ती खूब परवान चढ़ी और सियासत में बने इस दोस्ती के रिश्ते को निभाया गया। बता दें कि वैवाहिक कार्यक्रम में सियासत से परे जाकर तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर ने अटल बिहारी वाजपेयी की अगवानी की। इस शादी में लालकृष्ण आडवाणी भी पहुंचे थे।

यह वो दौर था जब दोनों भारतीय जनता पार्टी की जड़े जमाने में लगे थे। भैंरो सिंह जब तक जीवित रहे, तब अपने दिल्ली प्रवास के दौरान रोजाना अटल बिहारी वाजपेयी के आवास जाते थे और उनकी कुशलक्षेम पूछते थे। दोनों ही नेताओ ने इस दोस्ती के रिश्ते को बखूबी निभाया। हालांकि अब अटल जी राजनीति में सक्रीय नहीं है, वही भैरो सिंह अब इस दुनिया में ही नहीं है।
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