वो बहुत लंबे समय से सक्रिय नहीं थे... पर देह थी जो अपनी पवित्र आत्मा के साथ मौजूद थी। वो इसी धरा पर सांस ले रहे थे। इस वायुमंडल में उन पवित्र श्वासों की आवाजाही लोबान बनकर महक रही थी। वो मानवता के श्वेत वस्त्रों पर छिड़का हुआ एक ऐसा इत्र थे जिसकी खुशबू के लिए निकटता की जरूरत ही नहीं थी। अटलजी जिनके करीब थे जिनसे मिलते रहे उनको तो उन्होंने धन्य किया ही पर जो कभी उनसे मिल नहीं पाए उन्हें भी बहुत गहरे तक प्रभावित किया।
अटलजी एक ऐसी उम्मीद का नाम थे जो मानव मूल्यों में हमारी आस्था को मजबूत बनाए रखते हैं। जिनके रहते न्याय, धर्म, सत्य, अहिंसा जैसे शब्द अपने मायने नहीं खोते। अटल बिहारी वाजपेयी केवल एक पूर्व प्रधानमंत्री या भारत रत्न नहीं वरन वो मानव रत्न थे। धरती पर फिरने वाले हाड़- मांस के जिस जीव को हम मनुष्य कहते हैं उस मनुष्य की परिभाषा को रचने में बहुत सारे जीवन खप गए हैं।
आप के कर्म और व्यवहार में ऐसा क्या होना चाहिए कि आप मनुष्य होने में गर्व करो? इसे स्थापित करने में कई मानव जीवन खप गए। कलियुग में तो ऐसा करने वाले बिरले ही रह गए हैं। अटलजी उनमें से एक थे। अटलजी तमाम राजनेताओं में अपनी इतनी अलग और सर्व स्वीकार्य छवि इसलिए बना पाए क्योंकि उन्हों ने किसी भी समय मनुष्य होना नहीं छोड़ा। कब आप इस मायावी दुनिया के मकड़जाल में फंसकर अपनी भूमिका को बड़ा और मनुष्यता को छोटा कर देते हैं.... पता ही नहीं पड़ता।
ऐसा हो जाना आसान भी बहुत है.... पर तमाम स्वार्थों और दबावों के बीच मनुष्य बने रहना बहुत कठिन है..... आडवाणी जी की भरी रथ यात्रा के दौरान ये कहना कि आप अयोध्या जा रहे हैं.... लंका नहीं... अटल हो जाना है... गुजरात के कठिन समय में जो ये कहते कि राजधर्म का पालन नहीं हुआ.... अटल हो जाना है.... इंदिरा गांधी की सदन में तारीफ करना अटल हो जाना है.... संयुक्त राष्ट्र में सत्ता पक्ष द्वारा भेजा जाना और हिंदी का मान बढ़ाना अटल हो जाना है.... राजनीति की काली कोठरी से बिना कालिख बाहर आ जाना अटल हो जाना है.... राजनीति में शुचिता का भरोसा बन जाना अटल हो जाना है....
अटल जी को विनम्र श्रध्दांजलि