केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोमवार को कहा कि विश्व के नेता 5वीं संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सभा (यूएनईए) में प्लास्टिक प्रदूषण को नियंत्रित करने पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जहां भारत सतत उपयोग और पुनर्चक्रण अर्थव्यवस्था के मुद्दों को उठाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस सप्ताह के अंत में नैरोबी में यूएनईए में देश का प्रतिनिधित्व करने जा रहे भूपेंद्र यादव ने कहा कि भारत भी समुद्री कूड़े के मुद्दे पर एक प्रस्ताव पेश कर सकता है।
यूएनईए में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा भारत
उन्होंने कहा कि भारत सतत उपयोग और पुनर्चक्रण अर्थव्यवस्था के मुद्दों पर यूएनईए में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने जा रहा है। 2022 तक सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक को लेकर हमारा मंत्रालय पहले ही प्लास्टिक कचरा प्रबंधन (संशोधन) नियम 2022 ला चुका है। भारत समुद्री कूड़े के मुद्दे पर यूएनईए में एक प्रस्ताव भी पेश करेगा। हम इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में पर्यावरण और स्थिरता पर अन्य सदस्य देशों के साथ आम सहमति बनाने की कोशिश करेंगे। यह ग्लासगो में सीओपी 26 में पीएम द्वारा दिए गए जीवन मंत्र के अनुरूप है।
मंत्रालय के अनुसार, रविवार को प्लास्टिक प्रदूषण पर सदस्य देशों पेरू, रवांडा, जापान और भारत की ओर से तीन प्रस्ताव रखे गए। पेरू, रवांडा और जापान के दो मसौदा प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्यकारी लक्ष्य के सिद्धांत पर आधारित थे जबकि भारतीय मसौदा प्रस्ताव देशों द्वारा तत्काल सामूहिक स्वैच्छिक कार्रवाई के सिद्धांत पर आधारित था।
मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि वैश्विक कार्रवाई की अनुमति देने के लिए भारत एक नई अंतरराष्ट्रीय कानूनी रूप से बाध्यकारी संधि के लिए एक अंतर-सरकारी वार्ता समिति की स्थापना के लिए सहमत हुआ। अधिकारी ने कहा कि रविवार को कार्य समूह की बैठक में भारत द्वारा उठाई गई चिंताओं पर चर्चा हुई थी और भारतीय मसौदा प्रस्ताव के प्रमुख प्रावधानों को मर्ज किए गए समझौते के पाठ में जोड़ा गया था।