कश्मीर के पत्थरबाजों पर पैलेट गन के इस्तेमाल से भले विवाद खड़ा हो रहा हो भारत- बांग्लादेश सीमा पर हिंसक तस्करों के खिलाफ इस असलहे का इस्तेमाल कारगर तरीके से हो रहा है। भारत और बांग्लादेश के बीच प्रगाढ़ हो रही मित्रता के बावजूद मवेशी, नकली नोट, फैन्सीड्रील और गाबा नाम की नए मादक टैबलेट के तस्कर सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और उसकी समकक्ष बार्डर गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी) के लिए रोज नयी चुनौती खड़ी करते हैं। सबसे बड़ी समस्या है कि दोनों तरफ के तस्कर तीस चालीस के हुजूम में बीएसएफ जवानों पर हमला बोलते हैं। इसे काबू करने के लिए सुरक्षा बल पिलेट गन का इस्तेमाल करते हैं।
24 फरवरी 2012 को दोनों देशों के गृहमंत्रियों की बैठक में यह फैसला लिया गया था कि सीमा पर तस्करों के निबटने के लिए नॉन लेथल विपन का इस्तेमाल होगा। बीएसएफ का कहना है कि घाटी के हिंसक प्रदर्शनकारियों की तरह इन तस्करों पर पिलेट गन का इस्तेमाल मूल रुप से आत्मरक्षा के लिए किया जाता है। सीमा पर मौत की घटना को रोकने के लिए यहां एन्सास, बरेटा और एके-47 जैसे स्वचलित हथियार नहीं चलाए जाते।
भारत-बांग्लादेश के 4097 किलोमीटर सीमा के साउथ बंगाल फ्रंटियर के डीआईजी एस के बरुआ ने अमर उजाला को बताया कि मवेशियों की तस्करी सीमा पर हिंसा का मुख्य कारण है। बरुआ के मुताबिक बांग्लादेश के तस्कर भारत केतस्कर को मवेशियों को लिए एडवांस दे चुकेहोते हैं। लिहाजा तस्कर मवेशियों को पार कराने के लिए सुरक्षा बल पर हिंसक हमले करने से भी परहेज नहीं करते। इसकेचलते दो साल में बीएसएफ केपांच जवानों की मौत हो चुकी है। जबकि इस अवधि में 37 तस्कर मारे जा चुकेहैं। इस साल अबतक 14 तस्करों की मौत हो चुकी है।