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भारत- बांग्लादेश सीमा पर भी खूब चलते हैं पैलेट गन

Mon, 26 Sep 2016 12:50 AM IST
गुंजन कुमार/अमर उजला, जस्सौर (बांग्लादेश)
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- फोटो : PTI
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कश्मीर के पत्थरबाजों पर पैलेट गन के इस्तेमाल से भले विवाद खड़ा हो रहा हो भारत- बांग्लादेश सीमा पर हिंसक तस्करों के खिलाफ इस असलहे का इस्तेमाल कारगर तरीके से हो रहा है। भारत और बांग्लादेश के बीच प्रगाढ़ हो रही मित्रता के बावजूद मवेशी, नकली  नोट, फैन्सीड्रील और गाबा नाम की नए मादक टैबलेट के तस्कर सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और उसकी समकक्ष बार्डर गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी) के लिए रोज नयी चुनौती  खड़ी करते हैं। सबसे बड़ी समस्या है कि दोनों तरफ के तस्कर तीस चालीस के हुजूम में बीएसएफ जवानों पर हमला बोलते हैं। इसे काबू करने के लिए सुरक्षा बल पिलेट गन का इस्तेमाल करते हैं। 
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24 फरवरी 2012 को  दोनों देशों के गृहमंत्रियों की बैठक में यह फैसला लिया गया था कि सीमा पर तस्करों के निबटने के लिए नॉन लेथल विपन का इस्तेमाल होगा। बीएसएफ का कहना है कि घाटी के हिंसक प्रदर्शनकारियों की तरह इन तस्करों पर पिलेट गन का इस्तेमाल मूल रुप से आत्मरक्षा के लिए किया जाता है। सीमा पर मौत की  घटना को  रोकने के लिए यहां एन्सास, बरेटा और  एके-47 जैसे स्वचलित हथियार नहीं चलाए जाते। 

भारत-बांग्लादेश के 4097 किलोमीटर सीमा के साउथ बंगाल फ्रंटियर के डीआईजी एस के बरुआ ने अमर उजाला को  बताया कि मवेशियों की तस्करी सीमा पर हिंसा का मुख्य कारण है। बरुआ के मुताबिक बांग्लादेश के तस्कर भारत केतस्कर को मवेशियों को लिए एडवांस दे चुकेहोते हैं। लिहाजा तस्कर मवेशियों को पार कराने के लिए सुरक्षा बल पर हिंसक हमले करने से भी परहेज नहीं करते। इसकेचलते दो साल में बीएसएफ केपांच जवानों की मौत हो चुकी है। जबकि इस अवधि में 37 तस्कर मारे जा चुकेहैं। इस साल अबतक 14 तस्करों की मौत हो चुकी है। 
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भारत और बांग्लादेश के लिए यह चिंता का विषय है

- फोटो : PTI
बांग्लादेश बार्डर गार्ड (बीजीबी) के दक्षिण- पश्चिम रिजन के रिजनल  कमांडर मोहम्मद खलीलउर रहमान ने अमर उजाला को बताया कि हालांकि मावेशियों की तस्करी में पिछले साल केमुकाबले भारी गिरावट आई है। लेकिन सीमा पर हो रही मौतें बांग्लादेश केलिए चिंता का विषय है। मारने वालों में ज्यादातर बांग्लादेशी तस्कर हैं। भारत बाग्लादेश सीमा पर 366 ऐसी जगहें हैं जो भौगोलिक हालात की  वजह से तस्करों की मददगार साबित होती है। 

इसके अलावा दोनों तरफ की गरीब लोगों के लिए तस्करी पैसा कमाने का आसान जरिया बन जाता है। रहमान के मुताबिक दोनों देशों की मित्रता अभी चरम पर है। लिहादा दोनों सुरक्षा बल तस्करी की समस्या से उबरने की भतरपूर कोशिश में हैं। बांग्लादेश के लिए भारत की तरफ से जाने वाली फैन्सीड्रील नाम की नशे  की दवा और गाबा नाम का मादक टैबलेट बडी समस्या है। बीजीबी के सेक्टर कमांडर कर्नल मोहम्मद मेहब्बुर रहमान के मुताबिक फै न्सीड्रील बांग्लादेश केलिए राष्ट्रीय  समस्या बनती जा रही है। रहमान  के बताया कि  पहले गाबा टैबलेट म्यांमार कीतरफ से आता था। 

भारत और बांग्लादेश के लिए यह चिंता का विषय है कि पिछले कुछ दिनों से यह टैबलेट भारत  की तरफ से आ रहा है। बीएसएफ और बीजीबी साझा तरीके से इसकी जड़ तक पहुंचने की कोशिश में हैं। इधर नकली भारतीय नोट और मानव की तस्करी बांग्लादेश  की तरफ से बड़े पैमानै पर होता है। हालांकि बांग्लादेश के अधिकारियों ने नकली नोट और मानव तस्करी पर ना तो कोई ठोस दिया और  ना ही यह स्वीकारा कि बांग्लादेश में इसका बड़ा  रैकेट काम कर  रहा है। 
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