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आखिर बॉर्डर पार ऐसा क्या है कि दूरबीन लगा कर देख रहे हैं लोग

Mon, 17 Sep 2018 05:25 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पंजाब के गुरदासपुर जिले में अंतर्राष्ट्रीय सीमा के करीब इन दिनों अजीब सी हलचल देखने को मिल रही है। यहां एक दूरबीन लगाई गई है जिसकी नजर पाकिस्तान की तरफ है। यहां पहुंचने वालों की कतार लंबी है और दिनों दिन लंबी होती जा रही है। बड़ी संख्या में सिख समुदाय के लोग यहां पहुंच रहे हैं। 

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 सिख समुदाय की यह भीड़ गुरदासपुर के गुरुद्वारे जा रहे हैं जहां से वह पाकिस्तान में बने सिखों के पवित्र तीर्थस्थल करतारपुर साहिब का दर्शन कर रहे हैं। 

पिछले महीने ही पंजाब के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के शपथग्रहण समारोह से लौटे थे तब उन्होंने बयान दिया था कि पाकिस्तान आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा ने अगले साल गुरुनानक देव की 550 जयंती के मौके पर डेरा बाबा नानक से गुरुद्वारा करतारपुर साहिब का मार्ग खोलने का वादा किया है।
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इसी के बाद से यहां दर्शन करने आने वाले लोगों की संख्या बढ़ी है। इसके बाद पिछले हफ्ते पाकिस्तान के सूचना मंत्री फवाद अहमद चौधरी ने भी कहा कि इमरान खान सरकार भारतीय सिख तीर्थयात्रियों के लिए करतारपुर साहिब के लिए वीजा फ्री डायरेक्ट एक्सेस की अनुमति दिए जाने को लेकर विचार कर रही है।
 

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जब से करतारपुर खोले जाने की बात शुरू हुई है भारतीय सिखों में उम्मीद बढ़ गई है। फिलहाल करतारपुर के दर्शन की चाह रखने वाले श्रद्धालु दूरबीन से ही उस पवित्र स्थान का दर्शन कर रहे हैं। करतारपुर साहिब गुरुद्वारा सफेद रंग के संगमर्रर का बना है जिस दिन आसमान साफ होता है तो लोग इमारत का दर्शन कर पाते हैं। भारतीय श्रद्धालुओं के लिए यह जगह बीएसएफ ने तैयार कि है जो, बॉर्डर सीमा से कुछ ही दूर पर है।

जहां इनदिनों श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला जारी है। देश के कोने-कोने से यहां श्रद्धालु आ रहे हैं और दर्शन कर रहे हैं। वहां रहने वाले लोगों का कहना है कि पिछले कुछ समय से पाकिस्तान की तरफ नेपियर घास उग गई थी जिसकी वजह से लोग इसे देख नहीं पा रहे थे इसलिए अब बीएसएफ ने करतार साहिब की दर्शन की चाह रखने के लिए दूरबीन की व्यवस्था की है।  दर्शन स्थल पर यह दूरबीन लोहे के केस में लगाई गई है जिससे अब करतारपुर साहिब के दर्शन आराम से कर पा रहे हैं। दूरबीन से गुरुद्वारे का दर्शन कर भक्त प्रार्थना करते हुए देखे जा रहे हैं। 

 करतारपुर साहिब है सिखों का तीर्थस्थल 

ऐसी मान्यता है कि अपनी प्रसिद्ध चार यात्राओं को पूरा करने के बाद गुरुनानक देव 1522 में करतारपुर साहिब में ही रहने लगे थे यहीं उन्होंने अपने जीवन के आखिरी 17 वर्ष बिताए। उनकी मृत्यु के बाद यहां गुरुद्वारे का निर्माण करा दिया गया। पटियाला की श्रद्धालु बलजिंदर कौर कहती हैं, 'हर सिख पाकिस्तान में नानकाना साहिब और दूसरे गुरुद्वारों में बिना बाधा प्रवेश की प्रार्थना करता है। उम्मीद है कि हमारी प्रार्थना जल्द ही स्वीकार होगी।' 
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