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Shubhanshu Shukla: अंतरिक्ष यात्री शुभांशु बोले- 2047 तक विकसित भारत का सपना पूरा करना हर नागरिक की जिम्मेदारी

Thu, 20 Nov 2025 07:29 PM IST
राहुल कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू

सार

ग्रुप कैप्टन शुक्ला भारतीय वायुसेना के अधिकारी एवं परीक्षण पायलट हैं। उन्हें और तीन अन्य अंतरिक्ष यात्रियों को ‘गगनयान’ मिशन के तहत अंतरिक्ष में भेजने के लिए चयनित और प्रशिक्षित किया गया है। गगनयान को 2027 में अंतरिक्ष में भेजे जाने की उम्मीद है।
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अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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वायुसेना अधिकारी और अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने देशवासियों से अपील की कि वे 2047 तक विकसित भारत के सपने को साकार करने की जिम्मेदारी उठाएं। बंगलूरू टेक शिखर सम्मेलन में गुरुवार को उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को पाने के लिए जरूरी है कि हम सोचें कि हम देश को यहां से विकसित राष्ट्र की ओर कैसे ले जा सकते हैं। 

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उन्होंने कहा, भारत जल्द ही अपने नागरिकों को स्वदेशी रॉकेट और स्वदेशी कैप्सूल के माध्यम से अंतरिक्ष में भेजेगा। बता दें कि शुक्ला उन चार अंतरिक्ष यात्रियों में शामिल हैं जिन्हें भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान के लिए चुना गया है, जिसकी उड़ान 2027 में प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि इस मिशन के लिए साधारण स्ट्रॉ बनाने से लेकर जटिल लाइफ सपोर्ट सिस्टम तैयार करने तक, हर नागरिक का योगदान जरूरी है। उन्होंने बताया कि भारत में 300 से अधिक स्टार्टअप अंतरिक्ष क्षेत्र में सक्रिय हैं और आने वाले वर्षों में इनकी संख्या तेजी से बढ़ेगी।

अंतरिक्ष से कैसा दिखता है भारत?
एक्सियम-4 मिशन के अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष से भारत का भूभाग तीन समुद्रों बंगाल की खाड़ी, हिंद महासागर और अरब सागर से घिरा दिखाई देता है। कार्यक्रम में उन्होंने एक वीडियो भी दिखाया, जिसमें रात के समय बंगलूरू, पुणे और हैदराबाद जैसे शहर जगमगाते दिखाई दिए। शुक्ला ने कहा, अंतरिक्ष से आज भारत जितना चमकता दिखता है, भविष्य उससे कहीं अधिक उज्ज्वल है। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा, आसमान कभी सीमित नहीं था न मेरे लिए, न आपके लिए और न ही भारत के लिए।
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बता दें कि शुक्ला ने अपनी पहली अंतरिक्ष यात्रा एक्सिओम-4 मिशन के तहत की थी। यह एक वाणिज्यिक अंतरिक्ष यान है जिसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का सहयोग प्राप्त है। इसे ‘एक्सिओम स्पेस’ संचालित करता है।

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