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Tripura-Nagaland-Meghalaya Result: त्रिपुरा-नगालैंड में क्यों जीता भाजपा गठबंधन, मेघालय में क्या हुआ? चार कारण

हिमांशु मिश्रा
Updated Thu, 02 Mar 2023 07:13 PM IST

सार

बसे बड़ा सवाल ये उठता है कि आखिर इस बार पूर्वोत्तर के तीनों राज्यों के चुनाव में भाजपा गठबंधन क्यों सफल हुआ? भाजपा के जीत के बड़े कारण क्या हैं? आइए समझते हैं... 
 
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त्रिपुरा, मेघालय और नगालैंड विधानसभा चुनाव - फोटो : अमर उजाला
पूर्वोत्तर के तीनों राज्यों में चुनाव के नतीजे लगभग साफ हो चुके हैं। त्रिपुरा और नगालैंड में भाजपा गठबंधन पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रही है। मेघालय में एनपीपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। हालांकि, यहां भी माना जा रहा है कि भाजपा और यूडीपी के साथ मिलकर एनपीपी फिर से सरकार बना लेगी, जैसा कि 2018 में हुआ था। मतलब इस चुनाव में भी भाजपा अपना किला बचाने में कामयाब हो गई है। 

सबसे बड़ी बात ये है कि तीनों ही राज्यों में देश की सबसे पुरानी राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस की स्थिति सबसे ज्यादा खराब हुई है। तीनों ही राज्यों से कांग्रेस का प्रदार्शन निराशाजनक रहा है। वह भी तब जब 2016 तक नॉर्थ ईस्ट के ज्यादातर राज्यों में कांग्रेस और लेफ्ट का ही कब्जा था, लेकिन इसके बाद से सारे समीकरण तेजी से बदल गए। भाजपा ने एक के बाद एक पूर्वोत्तर के आठ में से छह राज्यों पर कब्जा कर लिया। 




ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि आखिर इस बार पूर्वोत्तर के तीनों राज्यों के चुनाव में भाजपा गठबंधन क्यों सफल हुआ? भाजपा के जीत के बड़े कारण क्या हैं? आइए समझते हैं... 
 
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त्रिपुरा, मेघालय और नगालैंड विधानसभा चुनाव - फोटो : अमर उजाला
पूर्वोत्तर के तीनों राज्यों में चुनाव के नतीजे लगभग साफ हो चुके हैं। त्रिपुरा और नगालैंड में भाजपा गठबंधन पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रही है। मेघालय में एनपीपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। हालांकि, यहां भी माना जा रहा है कि भाजपा और यूडीपी के साथ मिलकर एनपीपी फिर से सरकार बना लेगी, जैसा कि 2018 में हुआ था। मतलब इस चुनाव में भी भाजपा अपना किला बचाने में कामयाब हो गई है। 

सबसे बड़ी बात ये है कि तीनों ही राज्यों में देश की सबसे पुरानी राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस की स्थिति सबसे ज्यादा खराब हुई है। तीनों ही राज्यों से कांग्रेस का प्रदार्शन निराशाजनक रहा है। वह भी तब जब 2016 तक नॉर्थ ईस्ट के ज्यादातर राज्यों में कांग्रेस और लेफ्ट का ही कब्जा था, लेकिन इसके बाद से सारे समीकरण तेजी से बदल गए। भाजपा ने एक के बाद एक पूर्वोत्तर के आठ में से छह राज्यों पर कब्जा कर लिया। 



ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि आखिर इस बार पूर्वोत्तर के तीनों राज्यों के चुनाव में भाजपा गठबंधन क्यों सफल हुआ? भाजपा के जीत के बड़े कारण क्या हैं? आइए समझते हैं... 
 

त्रिपुरा विधानसभा चुनाव - फोटो : अमर उजाला
पहले जानिए चुनाव के नतीजे क्या आए? 

त्रिपुरा
यहां भारतीय जनता पार्टी ने IPFT के साथ मिलकर चुनाव लड़ा, जबकि कांग्रेस ने लेफ्ट के साथ गठबंधन कर लिया था। भाजपा ने 60 में से 54 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, जबकि IPFT के छह प्रत्याशी चुनावी मैदान में थे। लेफ्ट ने त्रिपुरा में सबसे ज्यादा 43 प्रत्याशी उतारे थे। कांग्रेस के केवल 13 उम्मीदवार मैदान में थे। इसके अलावा सीपीआई, आरएसपी, एआईएफबी भी इस गठबंधन का हिस्सा हैं। इन सभी ने एक-एक सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। एक सीट पर गठबंधन ने निर्दलीय उम्मीदवार का समर्थन किया था।

चुनाव के नतीजों में भाजपा ने सूबे में अपनी सत्ता बरकरार रखी। भाजपा को 30 सीटों पर जीत मिल चुकी है और दो पर बढ़त बनी हुई है। भाजपा के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ने वाली IPFT ने एक सीट पर जीत हासिल की है। 

कांग्रेस और लेफ्ट गठबंधन को बड़ा झटका लगा। कांग्रेस ने तीन सीटों पर जीत हासिल की, जबकि लेफ्ट के खाते में 11 सीटें आईं। मतलब गठबंधन करने के बावजूद दोनों को कुछ खास फायदा नहीं मिला। हालांकि, पहली बार चुनाव लड़ रही टिपरा मोथा ने बड़ी कामयाबी हासिल की। इनके 42 में से 13 प्रत्याशियों ने चुनाव में जीत दर्ज की। 

किस पार्टी को कितनी सीटों पर जीत मिली?   
पार्टी/गठबंधन सीटें 
BJP+IPFT   33
CPI(M)+कांग्रेस+अन्य   14
टिपरा मोथा   13
अन्य 00

ये भी पढ़ें : Tripura-Nagaland-Meghalaya Result: तीनों राज्यों में कौन होगा मुख्यमंत्री, कैसा होगा सरकार का स्वरूप? समझें

नगालैंड विधानसभा चुनाव - फोटो : अमर उजाला
नगालैंड
इस बार नगालैंड की 59 सीटों पर चुनाव हुए। यहां जुन्हेबोटो की आकुलुटो सीट से भाजपा प्रत्याशी और निर्वतमान विधायक काजहेटो किन्मी निर्विरोध चुनाव जीत चुके हैं। ऐसे में इस सीट पर चुनाव नहीं हुए। भारतीय जनता पार्टी और नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (एनडीपीपी) का गठबंधन हुआ। इसके तहत एनडीपीपी ने 40 और भाजपा ने 20 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। इसके अलावा कांग्रेस और एनपीएफ अलग-अलग चुनाव लड़े। कांग्रेस ने 23 और एनपीएफ ने 22 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। 19 निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी चुनाव में ताल ठोकी थी। 2018 में यहां विधानसभा के सभी 60 सदस्य सरकार का हिस्सा बन गए थे। मतलब कोई भी विपक्ष में नहीं था।

इस बार भी यहां भाजपा गठबंधन ने बड़ी जीत हासिल की। भाजपा के 20 में से 13 उम्मीदवार चुनाव जीत गए। वहीं, एनडीपीपी के 40 में से 25 प्रत्याशी विजयी हुए। कांग्रेस यहां एक भी सीट नहीं जीत पाई। एनपीपी के पांच उम्मीदवार चुनाव जीत गए। यहां एनसीपी ने भी बड़ा खेल किया। एनसीपी के सात प्रत्याशी चुनाव जीत गए हैं। चार निर्दलीय, दो लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) और एनपीएफ, आरपीआई के दो-दो उम्मीदवार चुनाव जीतने में कामयाब रहे। 

किस पार्टी को कितनी सीटों पर जीत मिली?   
पार्टी/गठबंधन सीटें 
BJP+NDPP     38
कांग्रेस 00
NPF   02
एनसीपी 07
दो लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) 02
एनपीपी 05
आरपीआई 02
निर्दलीय 04

ये भी पढ़ें : Election: 2014 तक पूर्वोत्तर के एक भी राज्य में नहीं थी BJP की सरकार, नौ साल में ऐसे बदला सियासी नक्शा
 

मेघालय विधानसभा चुनाव - फोटो : अमर उजाला
मेघालय
सबसे रोमांचक मुकाबला मेघालय में हुआ। यहां 60 में से 59 सीटों पर चुनाव हुए थे। एक सीट पर एक प्रत्याशी की मौत के चलते चुनाव रद्द हो गया। 59 सीटों पर हुए चुनाव के नतीजों ने आज सभी को हैरान कर दिया। किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला है। एनपीपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। इनके 25 प्रत्याशियों ने जीत हासिल की। दूसरे नंबर पर यूडीपी रही। इनके 11 उम्मीदवार चुनाव जीत गए। भाजपा के तीन, टीएमसी के पांच, कांग्रेस के पांच, एचएसपीडीपी, पीडीएफ के दो-दो उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। दो निर्दलीय विधायक भी चुने गए। वाइस ऑफ द पीपल पार्टी के चार उम्मीदवार चुनाव जीत गए।   

किस पार्टी को कितनी सीटों पर जीत मिली?
पार्टी/गठबंधन   सीटें 
NPP 25
TMC 05
BJP 03
कांग्रेस 05
UDP 11
वाइस ऑफ द पीपल पार्टी 04
एचएसडीपी 02
पीडीएफ 02
निर्दलीय 02
  
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भाजपा - फोटो : अमर उजाला
नगालैंड और त्रिपुरा में क्यों जीता भाजपा गठबंधन? 
इसे समझने के लिए हमने नॉर्थ ईस्ट राज्यों की राजनीति पर अच्छी पकड़ रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक संजय मिश्रा से बात की। उन्होंने कहा, 'पूर्वोत्तर के अंतर्गत आठ राज्य आते हैं। इनमें त्रिपुरा, मेघालय, नगालैंड, असम, मणिपुर, मिजोरम, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश शामिल हैं। 2014 तक इनमें से ज्यादातर राज्यों में या तो कांग्रेस या फिर लेफ्ट का राज हुआ करता था। इसके बाद कहानी बदलने लगी। एक-एक करके इन आठ में से छह राज्यों में भाजपा ने या तो अकेले दम पर सरकार बनाई या फिर सरकार का हिस्सा बनी।'


 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : Social Media
1. पीएम मोदी का पूर्वोत्तर पर फोकस : 2014 से पहले नॉर्थ ईस्ट के राज्यों में कांग्रेस और लेफ्ट का ही राज हुआ करता था। तब विकास के मुद्दे पर पूर्वोत्तर के इन राज्यों की कुछ खास चर्चा नहीं होती थी। 2014 के बाद तस्वीर बदलने लगी। पूर्वोत्तर के इन राज्यों के विकास के लिए केंद्र सरकार ने अलग से बजट में प्रावधान किया। 2014 में भाजपा के केंद्रीय सत्ता में आने के बाद नॉर्थ ईस्ट के लोगों को केंद्र सरकार की तमाम योजनाओं का सीधे फायदा दिलाने की कोशिश की गई। सबसे ज्यादा आवास योजना का लोगों को फायदा लोगों को मिला। 

ये भी पढ़ें :Tripura: प्रद्योत देबबर्मा की नई पार्टी टिपरा मोथा की क्यों हो रही चर्चा, त्रिपुरा की सियासत में क्या बदलेगा?

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह। - फोटो : ANI
2. विकास योजनाएं: केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद से पूर्वोत्तर के राज्यों में काफी तेजी से विकास हुआ। नॉर्थईस्ट के इन राज्यों को एयर, रेल और रोड कनेक्टिविटी के जरिए देश के बाकी हिस्सों से जोड़ा गया। इससे इन राज्यों की कमाई भी बढ़ गई। लोगों को रोजगार मिला। इसके अलावा बड़े पैमाने पर यहां शिक्षण संस्थानों की शुरुआत हुई। युवाओं को कौशल विकास और तकनीकी शिक्षा से जोड़ा गया।
 

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा - फोटो : Social Media
3. पुरानी लड़ाई को खत्म करने पर फोकस: केंद्र और फिर पूर्वोत्तर राज्यों में सरकार बनाने के बाद भाजपा का सबसे बड़ा फोकस राज्यों की पुरानी लड़ाइयों को खत्म करना था। मेघालय और असम का 50 साल पुराना सीमा विवाद खत्म कराने के प्रयास किए गए। इसी तरह नगालैंड-असम सीमा विवाद को भी निस्तारित करने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए। त्रिपुरा, असम और मेघालय में राजनीतिक हिंसाओं को लगभग खत्म कर दिया। त्रिपुरा में बांग्लादेशी घुसपैठ को खत्म कर दिया। इसी तरह नगालैंड में नागा संघर्ष को भी खत्म करने के लिए केंद्र सरकार ने अपने स्तर पर काम किया। 
 

नगालैंड में पीएम मोदी - फोटो : AMAR UJALA
4. पीएम मोदी का चेहरा : चुनाव में जीत का ये भी बड़ा फैक्टर रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चेहरा नॉर्थ ईस्ट के इन चुनावी राज्यों में भी काफी विश्वसनीय हो गया है। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी सूचना के अनुसार, 2014 में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनने के बाद से लेकर अब तक नॉर्थ ईस्ट के इन राज्यों में 97 बार दौरा कर चुके हैं। इसके अलावा केंद्र सरकार ने नॉर्थ ईस्ट के लिए मंत्रियों की एक अलग टीम भी बनाई है। ये केंद्रीय मंत्री भी लगातार इन राज्यों का दौरा करते रहे हैं।
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