फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

Tripura: प्रद्योत देबबर्मा की नई पार्टी टिपरा मोथा की क्यों हो रही चर्चा, त्रिपुरा की सियासत में क्या बदलेगा?

इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु मिश्रा Updated Thu, 02 Mar 2023 07:10 PM IST

सार

आज हम आपको बताएंगे कि आखिर राजा प्रद्योत देबबर्मा हैं कौन? कैसे उन्होंने त्रिपुरा की सियासी तस्वीर बदल दी? भाजपा को समर्थन देने के लिए उन्होंने क्या बोला? 
 
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रद्योत देबबर्मा - फोटो : अमर उजाला
त्रिपुरा चुनाव के नतीजे अब धीरे-धीरे साफ होने लगे हैं। यहां भारतीय जनता पार्टी गठबंधन की सरकार बनते दिख रही है। एकसाथ आने के बावजूद कांग्रेस और लेफ्ट को कुछ खास फायदा होता नहीं दिख रहा है। इन सबके बीच त्रिपुरा में सबसे ज्यादा चर्चा राजा प्रद्योत देबबर्मा की हो रही है। राजा प्रद्योत देबबर्मा ने चुनाव से ठीक पहले एक नई पार्टी बनाई थी, जिसका नाम रखा गया टिपरा मोथा पार्टी। शुरुआती रूझान के अनुसार, इस पार्टी को करीब 10 सीटें मिल सकती हैं। अगर नतीजों में कुछ भी उलटफेर हुआ तो राजा प्रद्योत देबबर्मा किंगमेकर साबित हो सकते हैं। प्रद्योत ने कुछ शर्तों के साथ भाजपा गठबंधन को समर्थन देने का एलान भी कर दिया है। 



ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि आखिर राजा प्रद्योत देबबर्मा हैं कौन? कैसे उन्होंने त्रिपुरा की सियासी तस्वीर बदल दी? भाजपा को समर्थन देने के लिए उन्होंने क्या बोला? 


 
विज्ञापन

प्रद्योत देबबर्मा - फोटो : अमर उजाला
त्रिपुरा चुनाव के नतीजे अब धीरे-धीरे साफ होने लगे हैं। यहां भारतीय जनता पार्टी गठबंधन की सरकार बनते दिख रही है। एकसाथ आने के बावजूद कांग्रेस और लेफ्ट को कुछ खास फायदा होता नहीं दिख रहा है। इन सबके बीच त्रिपुरा में सबसे ज्यादा चर्चा राजा प्रद्योत देबबर्मा की हो रही है। राजा प्रद्योत देबबर्मा ने चुनाव से ठीक पहले एक नई पार्टी बनाई थी, जिसका नाम रखा गया टिपरा मोथा पार्टी। शुरुआती रूझान के अनुसार, इस पार्टी को करीब 10 सीटें मिल सकती हैं। अगर नतीजों में कुछ भी उलटफेर हुआ तो राजा प्रद्योत देबबर्मा किंगमेकर साबित हो सकते हैं। प्रद्योत ने कुछ शर्तों के साथ भाजपा गठबंधन को समर्थन देने का एलान भी कर दिया है। 



ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि आखिर राजा प्रद्योत देबबर्मा हैं कौन? कैसे उन्होंने त्रिपुरा की सियासी तस्वीर बदल दी? भाजपा को समर्थन देने के लिए उन्होंने क्या बोला? 

 

पहले जानिए राजा प्रद्योत देबबर्मा के बारे में
चार जुलाई 1978 को दिल्ली में पैदा हुए प्रद्योत बिक्रम मनिक्य देबबर्मा त्रिपुरा के 185वें महाराजा कीर्ति बिक्रम किशोर देबबर्मा के इकलौते बेटे हैं। राजशाही परंपरा खत्म होने के बाद महाराजा कीर्ति बिक्रम किशोर देबबर्मा भी राजनीति में उतर आए थे। कांग्रेस से जुड़े और सांसद चुने गए। उनकी पत्नी महारानी बीहूबी कुमारी देवी भी कांग्रेस के टिकट पर दो बार विधायक चुनी गईं थीं। वह त्रिपुरा सरकार में मंत्री भी रह चुकी हैं। प्रद्योत की पढ़ाई शिलॉन्ग में हुई। 

ये भी पढ़ें : Tripura-Nagaland-Meghalaya Result: त्रिपुरा-नगालैंड में क्यों जीता भाजपा गठबंधन, मेघालय में क्या हुआ? चार कारण
 

कांग्रेस छोड़कर नई पार्टी बनाई
युवावस्था में ही प्रद्योत देबबर्मा ने भी राजनीति में कदम रख दिया था। कांग्रेस युवा मोर्चा से जुड़ गए और त्रिपुरा में आदिवासी वर्ग के लिए आवाज उठाने लगे। वह त्रिपुरा कांग्रेस के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। 2019 में कांग्रेस छोड़ने के बाद उन्होंने टिपरा मोथा का गठन किया। शुरू में यह गैर राजनीतिक संगठन था। हालांकि, 2021 में स्थानीय चुनाव में ताल ठोककर प्रद्योत बिक्रम के संगठन ने राजनीतिक पारी की शुरूआत की।  

कांग्रेस से अलग होने के बाद प्रद्योत ने ‘ग्रेटर टिपरालैंड’ की मांग रखी। प्रद्योत का कहना है कि, 'ग्रेटर टिपरालैंड' मौजूदा त्रिपुरा राज्य से अलग एक राज्य होगा। नई जातीय मातृभूमि मुख्य रूप से उस क्षेत्र के स्वदेशी समुदायों के लिए होगी जो विभाजन के दौरान पूर्वी बंगाल से भारत आए बंगालियों की वजह से अपने ही क्षेत्र में अल्पसंख्यक हो गए थे। 

1971 में बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम के दौरान बंगाली लोगों की एक बड़ी संख्या ने त्रिपुरा में शरण ली। जनगणना 2011 के अनुसार, बंगाली त्रिपुरा में 24.14 लाख लोगों की मातृभाषा है जो यहां की 36.74 लाख आबादी में से दो-तिहाई है। प्रद्योत अलग राज्य की मांग इसलिए कर रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि अलग राज्य आदिवासियों के अधिकारों और संस्कृति की रक्षा करने में मदद करेगा, जो बंगाली समुदाय के लोगों के आ जाने से अब अल्पसंख्यक हो गए हैं। 

ये भी पढ़ें : Election: 2014 तक पूर्वोत्तर के एक भी राज्य में नहीं थी BJP की सरकार, नौ साल में ऐसे बदला सियासी नक्शा

42 सीटों पर चुनाव लड़ा और अब भाजपा को समर्थन देने की बात कही
शुरुआती चुनावी रूझान आने के टिपरा मोथा प्रमुख प्रद्योत देबबर्मा ने कहा कि वह भाजपा को समर्थन देने के लिए तैयार हैं। हालांकि, इसके लिए उन्होंने शर्त भी रखी है। इस शर्त के अनुसार, सरकार बनने पर भाजपा को आदिवासी लोगों के लिए विशेष काम करना होगा। हालांकि, चुनाव से पहले प्रद्योत ने शर्त रखी थी कि वह किसी भी पार्टी को तभी समर्थन देंगे जब उन्हें लिखित में आदिवासियों के लिए अलग राज्य का आश्वासन दिया जाएगा। 

ये भी पढ़ें : Tripura-Nagaland-Meghalaya Result: तीनों राज्यों में कौन होगा मुख्यमंत्री, कैसा होगा सरकार का स्वरूप? समझें
विज्ञापन
विज्ञापन
Next