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नंबूदरीपाद की सीट से कन्हैया के दोस्त को उतार कर एलडीएफ ने बनाया मुकाबला दिलचस्प

Thu, 05 May 2016 10:42 AM IST
सुदीप ठाकुर/अमर उजाला,पट्टांबी (पलकड़)
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एंटी नेशनलिस्ट का फिकरा सुनकर चुकानी पड़ रही दोस्ती की कीमत - फोटो : अमर उजाला
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76 बरस के शंकरण, 65 के करीब के वासुदेवन और 75 बरस के वीके के लिए गर्मियों के ये दिन भारी मुश्किल भरे हैं। सरकारी नौकरियों से रिटायर हो चुके सीपीआई के ये बुजुर्ग कामरेड इन दिनों पार्टी के युवा कामरेड 29 बरस के मोहम्मद मुहसिन के चुनाव प्रचार का जिम्मा संभाल रहे हैं, जिसे इन दिनों एक नया नाम मिल गया है, कन्हैया का दोस्त! लेफ्ट फ्रंट ने केरल के पलकड़ जिले की पट्टांबी सीट से लगातार तीसरी बार चुनाव जीत चुके कांग्रेसी दिग्गज सीपी मोहम्मद के खिलाफ इस बार जेएनयू के पीएचडी स्कॉलर मुहसिन को मैदान में उतारा है। वैसे यहां से भाजपा के युवा उम्मीदवार एडवोकेट मनोज भी मैदान में हैं।
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सात भाई बहनों में दूसरे नंबर के मुहसिन वैसे तो यहीं पले बढ़े हैं, लेकिन जेएनयू से उठे विवाद के बाद जब लेफ्ट फ्रंट ने उन्हें इस सीट के लिए चुना, तो वह अचानक चर्चा में आ गए। तकरीबन चार साल जेएनयू में गुजार चुके मुहसिन के लिए जेएनयू के छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार का दोस्त होने की ‘कीमत’ भी यहां चुकानी पड़ रही है। वह जब पहली बार प्रचार के लिए निकले, तो उन्हें जो पहला फिकरा सुनने को मिला था वह था ‘एंटी नेशनलिस्ट।’



उनका कहना है, ‘मेरे खिलाफ सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार तक किया गया है और मुझ पर अफजल गुरु की फांसी का विरोध करने की तोहमत तक लगाई गई।’ इन दिनों मुहसिन का चुनाव कार्यालय पंट्टाबी स्थित मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी का भवन बन गया है। थोड़ी देर पहले ही जनसंपर्क से चुनाव कार्यालय लौटे मुहसिन से जब सवाल किया गया कि क्या यहां भी जेएनयू कोई मुद्दा है? तो उन्होंने कहा कि नहीं, जिनके कारण जेएनयू मुद्दा बना, वे मुद्दे सिर्फ जेएनयू ही नहीं, बल्कि केरल और पूरे देश के हैं।
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वास्तव में पट्टांबी सीट की पहचान कम्युनिस्ट दिग्गज ईएमएस नंबदूरीपाद की वजह से भी है। और जैसा कि शंकरण याद दिलाते हैं कि दुनिया की पहली निर्वाचित कम्युनिस्ट सरकार बनाने वाले नंबदूरीपाद ने इस सीट से चार बार चुनाव जीता था। अपने 15 बरस के कार्यकाल के दौरान अच्छी खासी लोकप्रियता अर्जित कर चुके सीपी मोहम्मद ने यहां खासा काम किया है। पलकड़ से पंट्टाबी के रास्ते पर जनरल स्टोर चलाने वाले मोहम्मद अली कहते हैं कि मोहम्मद सही आदमी है, लेकिन कन्हैया का दोस्त भी अच्छा है।



उनसे सहमति जताते हुए रिटायर टीचर अब्दुल रहमान कहते हैं कि सीपी मोहम्मद ने लोगों के कल्याण के लिए अच्छा काम किया है, लेकिन मोहसिन युवा है। धीरे धीरे यहां प्रचार जोर पकड़ रहा है। पूरे शहर में मुहसिन और कांग्रेस के सीपी मोहम्मद के साथ ही भाजपा के मनोज के बड़े-बड़े फ्लैक्स नजर आते हैं। इतना ही नहीं, जनसंपर्क के बीच ही मनोज को आप उसी रेस्तरां में भोजन करते देख सकते हैं, जहां सीपीआई के कार्यकर्ता भी पहुंच जाते हैं। मनोज उनसे कुशलक्षेम पूछना नहीं भूलते। शंकरण कहते हैं पॉलिटिक्स में यह सब चलता है और साथ ही यह भी जोड़ देते हैं कि वह एक नेक इंसान हैं और वह मेरे मित्र हैं। इस उमस भरी गर्मी में हिंदुओं और मुस्लिमों की तकरीबन बराबर आबादी वाली पंट्टाबी सीट का अभी मिजाज भांपना जरा मुश्किल है।
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