सुनील अरोड़ा, मुख्य चुनाव आयुक्त, भारत
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चुनाव आयोग देश का संवैधानिक निकाय है और इसके निर्णय तथा निष्पक्षता का आदर लोकतांत्रिक धर्म से जुड़ा है। चुनाव आयोग ने शुक्रवार को पांच राज्यों में चुनाव की तारीखों का एलान कर दिया है। जहां जितनी बड़ी चुनौतियां है, वहां निष्पक्ष, भयरहित चुनाव को सुनिश्चित करने के लिए आयोग ने उतने चरणों में मतदान कराने की घोषणा की है। पांच राज्यों में कुल 822 विधानसभा सीटें हैं, इनमें पश्चिम बंगाल की 294 सीटों पर आठ चरणों में चुनाव होंगे। असम की 126 सीटों पर तीन चरणों में मतदान होगा। शेष बचे तीन राज्यों (तमिलनाडु, केरल, पुडुचेरी) की 402 सीटों पर एक ही चरण में चुनाव होंगे।
मुख्य फोकस बंगाल पर, दूसरे नंबर पर असम
मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने बताया कि केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु में एक ही चरण में छह अप्रैल को मतदान होगा। असम में पहला चरण 27 मार्च, दूसरा 01 अप्रैल और तीसरा 06 अप्रैल को होगा। वहीं पश्चिम बंगाल में चुनाव के आठ चरण होंगे। पहला चरण 27 मार्च, दूसरा 01 अप्रैल, तीसरा 06 अप्रैल, चौथा 10 अप्रैल, पांचवां 17 अप्रैल, छठवां 22, सातवां 26 और आठवें चुनाव का चरण 29 अप्रैल को पूरा होगा। इस तरह से चारों केन्द्र शासित और एक केन्द्र शासित प्रदेश की मतगणना दो मई को होगी। गौरतलब है कि पुडुचेरी में हाल में ही अल्पमत में आने के बाद मुख्यमंत्री वी नारायण सामी ने पद से इस्तीफा दे दिया था और अब वहां भी चुनाव कराने की घोषणा हो गई है।
अभिजीत मुखर्जी ने कहा चुनाव बाद बनेगी धर्म निरपेक्ष सरकार
भाजपा के नेता और पश्चिम बंगाल के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने चुनाव आयोग की इस घोषणा का स्वागत किया है। भाजपा के उपाध्यक्ष राजकमल पाठक ने कहा कि अब चुनाव की अधिसूचना जारी हो गई है। राज्य की जनता बदलाव के लिए तैयार है और दो मई को चुनाव नतीजे आने के साथ उसका इंतजार खत्म हो जाएगा।
जंगीपुर से कांग्रेस सांसद अभिजीत मुखर्जी ने कहा कि निष्पक्ष चुनाव कराना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। लोग निष्पक्ष, भयरहित चुनाव में भाग लें, मतदान करें। कोई किसी को डराए नहीं और कोई धमकाए नहीं। मुखर्जी ने कहा कि चुनाव आयोग की घोषणा में पूरा फोकस बंगाल पर दिखाई दे रहा है। एनडीए का टारगेट भी नजर आ रहा है। कांग्रेस सांसद का कहना है कि इस बार मुकाबला कड़ा है, लेकिन चिंता की कोई बात नहीं है। राज्य में धर्म निरपेक्ष सरकार ही सत्ता में आएगी। भले ही यह मिली-जुली क्यों न हों और इसमें कई धर्म निरपेक्ष शामिल हों।
टीएमसी के गुंडों से लड़ना है, इसलिए जरूरी है आठ चरण में चुनाव
फैसला चुनाव आयोग का है, इसलिए पश्चिम बंगाल से भाजपा के सांसद आठ चरणों के मतदान पर खुलकर टिप्पणी नहीं करना चाहते। पूछने पर वह केवल इतना कहते हैं कि अब तक भाजपा के पौने दो सौ कार्यकर्ताओं की हत्या हो चुकी है। तृणमूल कांग्रेस के गुंडे राज्य में आतंक का पर्याय बन गए हैं। सूत्रों का कहना है कि निष्पक्ष और भयमुक्त चुनाव के लिए आठ चरणों में मतदान होना एक अच्छा निर्णय है। ताकि पर्याप्त संख्या में अर्धसैनिक बलों की मौजूदगी में चुनावों को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और भयरहित तरीके से संपन्न कराया जा सके।