ओडिशा के मयूरभंज जिले में युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म का मामला पूरी तरह झूठा साबित हुआ है। मामले की जांच के दौरान युवती और उसकी मां ने अपना जुर्म कबूल लिया है। वहीं पुलिस ने बताया की जेल में बंद आरोपियों ने बदला लेने के लिए साजिश रची थी।
ओडिशा पुलिस ने सोमवार को बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि मयूरभंज जिले में 22 वर्षीय महिला के साथ हुए कथित सामूहिक दुष्कर्म का मामला झूठा निकला। जांच में सामने आया है कि यह आरोप एक साजिश के तहत लगाए गए थे, ताकि कुछ लोग अपने दुश्मनों से बदला ले सकें।
क्या था पूरा मामला?
शनिवार को उडाला थाना क्षेत्र में महिला की शिकायत पर पुलिस ने सामूहिक दुष्कर्म का मामला दर्ज किया था। महिला ने आरोप लगाया था कि 29 अगस्त को उडाला-बालासोर स्टेट हाईवे पर पांच लोगों ने नौकरी देने का झांसा देकर उसे फंसाया और फिर सामूहिक दुष्कर्म किया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार भी कर लिया। लेकिन आगे की जांच में सच कुछ और ही निकला।
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पुलिस की जांच में खुलासा
उप-मंडल पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) हृषिकेश नायक ने बताया कि जब गहराई से जांच हुई तो पाया गया कि आरोप पूरी तरह से झूठे हैं। जांच से पता चला कि जिन दो आरोपियों के नाम शिकायत में लिए गए थे, उनमें से एक घटना वाले दिन यानी 29 अगस्त को तेलंगाना में मौजूद था। पुलिस ने महिला और उसकी मां से कड़ाई से पूछताछ की। दोनों ने मजिस्ट्रेट के सामने स्वीकार किया कि उन्होंने झूठा आरोप लगाया था।
साजिश की पूरी कहानी
पुलिस के अनुसार, जेल में बंद दो कैदियों ने इस झूठे मामले की साजिश रची थी। ये दोनों कैदी महिला की मां को पहले से जानते थे।उन्होंने महिला और उसकी मां को इस्तेमाल कर अपने दुश्मनों के खिलाफ झूठा मामला दर्ज करवाया। पूरी साजिश जेल के अंदर बैठकर रची गई थी। पुलिस का कहना है कि अब यह तय किया जाएगा कि महिला और उसकी मां के खिलाफ झूठा मामला दर्ज करने पर क्या कानूनी कार्रवाई की जाए। फिलहाल इस पर विचार हो रहा है।
मामले में राजनीतिक घटनाक्रम
इस घटना के बाद राजनीति भी गर्म हो गई। विपक्षी कांग्रेस पार्टी ने रविवार को इस कथित सामूहिक दुष्कर्म की जांच के लिए एक तथ्य-खोजी समिति गठित कर दी थी। अब पुलिस के खुलासे के बाद कांग्रेस की टीम की रिपोर्ट पर भी सवाल उठेंगे।