असम के चिरांग में वन भूमि पर कब्जे के आरोप में कुछ लोगों को पकड़ने पर विवाद हो गया। नाराज भीड़ ने वन कार्यालय में तोड़फोड़ की और सरकारी गाड़ियों को आग लगा दी। इस हिंसा में कई कर्मचारी घायल हुए हैं। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने और अपनी शिकायतें प्रशासन को सौंपने की अपील की है।
असम के चिरांग और कोकराझार जिलों में बेदखली अभियान के बाद हिंसा और तेज हो गई है। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने दोनों जिलों में मोबाइल इंटरनेट और डाटा सेवाएं निलंबित कर दी हैं। शुक्रवार को चिरांग जिले के रुनिखाता रेंज कार्यालय में उग्र भीड़ ने जमकर तोड़फोड़ की और परिसर में खड़े सरकारी वाहनों में आग लगा दी। इस हिंसा में वनकर्मियों और पुलिसकर्मियों समेत कई लोग घायल हुए हैं। फिलहाल इलाके में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन तनाव बना हुआ है।
विज्ञापन
अधिकारियों के अनुसार, बृहस्पतिवार को कुछ स्थानीय लोगों को आरक्षित वन भूमि पर अतिक्रमण के आरोप में हिरासत में लिया गया था। पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ दिया गया, लेकिन इसके विरोध में शुक्रवार सुबह बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए और हिंसक हो गए।
पथराव, लाठीचार्ज और सड़क जाम
प्रदर्शनकारियों ने वन विभाग के कर्मचारियों पर पथराव किया और आरोप लगाया कि एक दिन पहले उनके साथ मारपीट की गई थी, जिसमें दो महिलाएं भी घायल हुई थीं। भीड़ ने वन कार्यालय और आवासीय क्वार्टर में तोड़फोड़ की, फर्नीचर जलाकर सड़क जाम कर दी और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। स्थिति को काबू में लाने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा और अतिरिक्त बल तैनात किया गया। यह पूरा विवाद रिपु चिरांग रिजर्व फॉरेस्ट में अवैध कटाई और जमीन खाली कराने की कार्रवाई से जुड़ा है, जो भारत-भूटान सीमा के पास स्थित है।
तनाव फैलने की आशंका
प्रशासन ने आशंका जताई है कि हिंसा का असर आसपास के इलाकों में फैल सकता है, इसलिए अफवाहों और भड़काऊ संदेशों को रोकने के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद की गई हैं। हालांकि, वॉयस कॉल और ब्रॉडबैंड सेवाएं चालू रहेंगी। पुलिस अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने और शिकायतों को प्रशासन के सामने रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सड़क जाम और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना समस्या का समाधान नहीं है। फिलहाल इलाके में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन तनाव बना हुआ है।