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हैती में बिना हैजा टीका लिए गई थी भारतीय शांति सेना, अब पड़ सकता है महंगा

Mon, 09 Jan 2017 12:15 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : getty
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कैरेबियन देश हैती में बिना हैजा का टीका लिए घुसना भारतीय शांति सैनिकों को महंगा पड़ सकता है। खबर है कि संयुक्त राष्ट्र इस मामले की जांच करने जा रहा है और भारत सरकार से जवाब भी मांगा है। आपको बता दें कि भारत के सबसे पुराने अर्धसैनिक बल असम राइफल्स के 100 से अधिक जवान पिछले साल जुलाई-अगस्त में कैरेबियन देश हैती गए थे।
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उस समय गृह मंत्रालय ने यह प्रमाणित भी किया था कि इन जवानों ने हैजा का टीका लिया है। संयुक्त राष्ट्र ने आधिकारिक तौर पर भारत सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है कि उन्होंने इन सैनिकों को प्रमाणित क्यों किया।

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक हैती में हैजा फैलाने का आरोप संयुक्त राष्ट्र पर लगता रहा है। हैती में 2010 से पहले हैजा का कोई मामला सामने नहीं आया था, लेकिन संयुक्त राष्ट्र शांति सेना के वहां पहुंचने के बाद से हैजा के कई मामले सामने आए हैं। यही वजह है कि हैती में हैजा फैलाने का आरोप संयुक्त राष्ट्र पर लगता रहा है।
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हालांकि इस पर संयुक्त राष्ट्र ने निराशा जताई थी और तत्कालीन संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए इस पर मांफी भी मांगी थी। 2010 में जो शांति सेना हैती गई थी उसमें अधिकतर जवान नेपाल से थे। आरोप है कि एक नदी के किनारे इन शांति दूतों का प्रशिक्षण शिविर था और उसी नदी के जरिए हैजा देश में फैल गई।
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'हैजा से करीब 10 हजार लोगों की जान गई'

फाइल फोटो - फोटो : getty
बीते छह साल में हैती में हैजा से करीब 10 हजार लोगों की जान जा चुकी है। हैती इसके लिए आधिकारिक तौर पर संयुक्त राष्ट्र को दोषी मानता है। हैती की तरफ से कड़ी आलोचना के बाद संयुक्त राष्ट्र ने साल 2015 में हैती जाने से पहले शांतिदूतों के लिए हैजा का टीका लेना अनिवार्य कर दिया।

इसके एक साल बाद ही असम राइफल्स के 100 जवान हैती पहुंचे। इनका दावा था कि इन्होंने हैजा का टीका लिया है। अब इन जवानों को स्थानीय प्रशासन द्वारा हैजा का टीका दिया जा रहा है। असम राइफल्स के एक प्रवक्ता ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि हमारे जवान संयुक्त राष्ट्र द्वारा गठित पुलिस युनिट के हिस्सा थे। 
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