साल 1830 तक कछार एक स्वतंत्र राज्य हुआ करता था। 1832 में यहां के राजा की मौत हो गई थी। राजा का कोई उत्तराधिकारी न होने की वजह से इस राज्य पर ईस्ट इंडिया कंपनी ने 'डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स' के तहत अपने नियंत्रण में ले लिया था। इस नियम के अनुसार किसी राजा की मौत बिना उत्तराधिकारी के होने पर राज्य को ब्रिटिश राज्य में मिला दिया जाता था। अंग्रेजों की योजना लुशाई हिल्स में चाय बागान उगाने की थी, लेकिन स्थानीय ऐसा नहीं चाहते थे। उन्होंने ब्रिटिश इलाकों में सेंधमारी करनी शुरू कर दी। जिसके चलते 1875 में अंग्रेजों ने इनर लाइन रेगुलेशन को लागू किया।
इनर लाइन रेगुलेशन यानी आईएलआर के जरिए असम में पहाड़ी और आदिवासी इलाकों को अलग किया गया। मिजो आदिवासी इसके समर्थन में थे क्योंकि उन्हें लग रहा था कि इससे उनकी जमीन पर कोई जबरन कब्जा नहीं कर पाएगा। लेकिन, 1933 में अंग्रेजों ने कछार और लुशाई हिल्स के बीच एक औपचारिक सीमा रेखा खींच दी। इस प्रक्रिया में मिजो आदिवासियों को शामिल नहीं किया गया, जिसका उन्होंने विरोध किया। उनकी मांग थी कि आईएलआर को फिर से लागू किया जाए। सीमा को लेकर यही विवाद अब तक चला आ रहा है जिसका समाधान सालों से नहीं मिल पा रहा है।
असम सरकार की ओर से विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार मिजोरम के निवासियों ने बराक घाटी क्षेत्र में स्थित तीन जिलों में 1777.58 हेक्टेयर जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है। इसमें से हेलाकांदी में 1000 हेक्टेयर, कछार में 400 हेक्टेयर और करीमगंज में 377.58 हेक्टेयर जमीन पर कब्जा होने की जानकारी सरकार ने दी थी। वहीं, मिजोरम ने बीती 16 जुलाई को आरोप लगाया था कि असम उसकी जमीन पर अपना दावा कर रहा है। इन विवादों को सुलझाने के लिए दोनों राज्यों के बीच कुछ समझौते भी हुए हैं लेकिन उनका कोई सकारात्मक परिणाम नहीं दिख पाया है।
असम-मिजोरम सीमा पर स्थिति जून के अंत से तनावपूर्ण बनी हुई है जब असम पुलिस ने कथित तौर पर एतलांग हनार नामक इलाके को अपने नियंत्रण में ले लिया था। मिजोरम ने असम पर अतिक्रमण का आरोप लगाया था। मिजोरम के तीन जिले (आइजल, कोलासिब और ममित) असम के कछार, करीमगंज और हेलाकांडी जिलों से करीब 164.4 किमी की सीमा साझा करते हैं। 30 जून को मिजोरम ने आरोप लगाया था कि असम ने कोलासिब में अतिक्रमण किया है। असम के अधिकारियों का आरोप है कि मिजोरम ने हेलाकांडी में 10 किमी अंदर पान खेती शुरू की है, इमारतें बनाई हैं।