ऑल यूनियन यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) के अध्यक्ष मौलाना बदरुद्दीन अजमल की हिंदुओं पर की गई विवादित टिप्पणी पर हंगामा रुक नहीं रहा है। अब असम के सीएम हिमंत बिस्व सरमा ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बोंगाईगांव में मौलाना बदरुद्दीन अजमल पर निशाना साधते हुए कहा कि वे सिर्फ वोट बैंक की राजनीति के लिए समाज के एक वर्ग को खुश करने के लिए कुछ बयान दे रहे हैं। इससे पहले कांग्रेस ने भी उनके बयान को लेकर नाराजगी जताई थी। कांग्रेस ने मौलाना बदरुद्दीन अजमल के खिलाफ शिवसागर जिले के सिमलुगुरी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी।
हिमंत बिस्व सरमा ने साधा निधाना
बोंगाईगांव में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने तंज कसते हुए कहा कि बदरुद्दीन अजमल ने कहा था कि महिलाएं ज्यादा से ज्यादा बच्चे पैदा करती रहें, लेकिन मेरा कहना है कि अगर महिलाएं ज्यादा बच्चे पैदा करती हैं तो अजमल बच्चों के बड़े होने तक उनकी परवरिश करें और उनका खर्चा उठाएं।
इस दौरान अपील करते हुए सीएम ने कहा कि 'मैं अपनी मुस्लिम बहनों से कहना चाहता हूं कि बदरुद्दीन अजमल की बात मत सुनो और दो से ज्यादा बच्चे पैदा मत करो। अगर एक महिला कई बच्चों को जन्म देती है, तो इसका असर उस पर शारीरिक रूप से पड़ेगा इतना ही नहीं हमारे समाज पर भी इसका असर पड़ेगा और असम तबाह हो जाएगा।'
महिला बच्चे पैदा करने की फैक्ट्री नहीं
सीएम ने कहा कि एक महिला बच्चे पैदा करने की फैक्ट्री नहीं है। बदरुद्दीन अजमल सिर्फ वोट बैंक की राजनीति के लिए समाज के एक वर्ग को खुश करने के लिए कुछ बयान दे रहे हैं।
जानबूझकर की गई टिप्पणी
इससे पहले, असम विधानसभा में विपक्ष के नेता सैकिया ने कहा कि अजमल की टिप्पणियों ने हिंदू आबादी, विशेष रूप से भारत की हिंदू महिलाओं के प्रति जानबूझकर वैमनस्य, घृणा और दुर्भावना की भावना पैदा की है। सैकिया ने दावा किया कि बदरुद्दीन की टिप्पणी ने धर्मों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा दिया और अगर अजमल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं की गई तो स्थिति और खराब हो सकती है।
अन्य पार्टियां पहले ही दर्ज करा चुकी हैं शिकायत
असम जातीय परिषद (एजेपी) पहले ही राज्य के विभिन्न हिस्सों में धुबरी के सांसद बदरुद्दीन के खिलाफ शिकायत दर्ज करा चुकी है, जबकि तृणमूल कांग्रेस की युवा शाखा ने भी शनिवार को इस मामले में पुलिस के समक्ष एक लिखित बयान दिया था। वहीं भाजपा ने भी इस मामले में शिकायत दर्ज कराई है।
इस विवादित बयान से मचा बवाल
शुक्रवार को अजमल ने हिंदुओं पर विवादित बयान देते हुए कहा था, हिंदुओं को बच्चों के मामले में मुसलमानों का फॉर्मूला अपनाना चाहिए और बच्चों की कम उम्र में ही शादी कर देनी चाहिए। मुस्लिम युवक 20 से 22 साल की उम्र में शादी करते हैं और मुस्लिम महिलाएं 18 वर्ष की उम्र में शादी करती हैं, जो संवैधानिक है। उन्होंने कहा, वे (हिंदू) शादी से पहले एक, दो या तीन अवैध पत्नियां रखते हैं। वे यहां नहीं रूके, अजमल ने कहा, वे बच्चों को जन्म नहीं देते, खुद का आनंद लेते हैं और पैसा बचाते हैं।
बदरुद्दीन ने मांगी थी माफी
ऑल यूनियन यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) के अध्यक्ष और सांसद मौलाना बदरुद्दीन अजमल ने विवाद बढ़ने के बाद अंतत: शनिवार देर रात अपने बयान के लिए माफी भी मांग ली थी। उन्होंने मीडिया के सामने कहा कि मैं शर्मिंदा हूं, मैं लज्जित हूं। मुझ जैसे सीनियर नेता के मुंह से ऐसा नहीं निकलना चाहिए था। मेरे कहने से अगर किसी को दुख पहुंचा हो तो मैं क्षमा चाहता हूं। मेरी मंशा किसी को कष्ट पहुंचाने की नहीं थी। अब इसे यहीं खत्म करके हमें आगे बढ़ना चाहिए।